Friday, 9 January 2026

​Class 12 History Chapter 12 Notes in Hindi | संविधान का निर्माण | Framing the Constitution




अध्याय 12: संविधान का निर्माण


1. परिचय और पृष्ठभूमि (Introduction and Background)

 * संविधान का लागू होना: भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया। यह दुनिया का सबसे लंबा संविधान है।

 * निर्माण का समय: इसे दिसंबर 1946 से नवंबर 1949 के बीच बनाया गया। इस दौरान संविधान सभा के 11 सत्र हुए और 165 दिन बैठकें चलीं।

 * उथल-पुथल का दौर: संविधान निर्माण का समय भारी उथल-पुथल वाला था:

   * 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिली, लेकिन विभाजन के साथ।

   * 1942 का 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस का सशस्त्र संघर्ष लोगों को याद था।

   * 1946 में शाही भारतीय नौसेना (Royal Indian Navy) का विद्रोह हुआ।

   * हिंदू-मुस्लिम दंगे (विशेषकर कलकत्ता और पंजाब में) और शरणार्थियों की समस्या।

   * देशी रियासतें: भारत का एक-तिहाई हिस्सा नवाबों और राजाओं के नियंत्रण में था, जिन्हें भारत या पाकिस्तान में मिलने या स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया था, जो एक बड़ी समस्या थी।


2. संविधान सभा का गठन (The Constituent Assembly)

 * चुनाव प्रक्रिया: सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक मताधिकार से नहीं, बल्कि 1945-46 के प्रांतीय चुनावों के आधार पर अप्रत्यक्ष रूप से हुआ था।

 * कांग्रेस का वर्चस्व: सभा में कांग्रेस का भारी बहुमत था (82% सदस्य)। मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया और पाकिस्तान की माँग जारी रखी।

 * जनमत का प्रभाव: सभा में होने वाली बहसें अखबारों में छपती थीं और जनता की राय (आलोचना/सुझाव) भी फैसलों को प्रभावित करती थी।


3. प्रमुख व्यक्तित्व और उनकी भूमिका (Key Personalities)

संविधान सभा में 6 सदस्यों की भूमिका सबसे अहम थी:

 * जवाहरलाल नेहरू:

   * इन्होंने "उद्देश्य प्रस्ताव" (Objectives Resolution) पेश किया।

   * राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) का प्रस्ताव रखा।

 * वल्लभ भाई पटेल:

   * पर्दे के पीछे सहमति बनाने का काम किया और देशी रियासतों को भारत में मिलाने में भूमिका निभाई।

 * राजेंद्र प्रसाद:

   * संविधान सभा के अध्यक्ष थे। चर्चाओं को रचनात्मक दिशा देना इनकी जिम्मेदारी थी।

 * बी.आर. अम्बेडकर:

   * प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे।

   * गाँधी जी की सलाह पर कानून मंत्री बने।

 * के.एम. मुंशी (गुजरात) और अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर (मद्रास):

   * ये दोनों वकील थे और प्रारूप तैयार करने में अम्बेडकर की मदद की।

प्रशासनिक अधिकारी:

 * बी.एन. राव: संवैधानिक सलाहकार (Constitutional Advisor)।

 * एस.एन. मुखर्जी: मुख्य योजनाकार (Chief Draftsman), जो जटिल प्रस्तावों को कानूनी भाषा देते थे।


4. संविधान की दृष्टि: उद्देश्य प्रस्ताव (Vision: Objectives Resolution)

 * तारीख: 13 दिसंबर 1946 को नेहरू ने पेश किया।

 * मुख्य बिंदु:

   * भारत एक "स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य" होगा।

   * न्याय, समानता और स्वतंत्रता की गारंटी।

   * अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के लिए सुरक्षा।

 * नेहरू का भाषण: उन्होंने अमेरिकी और फ्रांसीसी क्रांतियों का हवाला दिया लेकिन कहा कि भारत सिर्फ नक़ल नहीं करेगा, बल्कि अपनी व्यवस्था खुद रचेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का स्वरूप भारतीय जनता के स्वभाव के अनुरूप होना चाहिए।

 * साम्राज्यवाद का साया: कम्युनिस्ट सदस्य सोमनाथ लाहिड़ी ने कहा कि संविधान सभा अंग्रेजों के साये में काम कर रही है। इसके जवाब में नेहरू ने कहा कि सभा का असली स्रोत "जनता की इच्छा" है।


5. मुख्य विवाद और बहसें (Major Debates)

A. अधिकारों का निर्धारण (Defining Rights)

1. पृथक निर्वाचिका (Separate Electorates) का मुद्दा:

 * समर्थन (B. Pocker Bahadur): उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने के लिए पृथक निर्वाचिका जरूरी है, वरना उनकी आवाज़ नहीं सुनी जाएगी।

 * विरोध:

   * सरदार पटेल: इसे "विष" (Poison) कहा जो देश के टुकड़े कर देगा।

   * गोविंद वल्लभ पंत: इसे अल्पसंख्यकों के लिए "आत्मघाती" बताया क्योंकि वे हमेशा के लिए अलग-थलग हो जाएँगे।

   * परिणाम: पृथक निर्वाचिका को खारिज कर दिया गया।

2. अल्पसंख्यक कौन हैं? (Defining Minorities):

 * एन.जी. रंगा (N.G. Ranga): उन्होंने कहा असली अल्पसंख्यक "गरीब और दबे-कुचले" लोग हैं। उन्हें सिर्फ कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि "सहारे (सीढ़ी)" की ज़रूरत है।

 * जयपाल सिंह (Jaipal Singh): आदिवासियों के प्रतिनिधि। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को 6000 साल से अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने पृथक निर्वाचिका नहीं माँगी, लेकिन विधायिका में आरक्षण की माँग की।

3. दमित जातियाँ (Depressed Castes/Dalits):

 * जे. नागप्पा और के.जे. खाण्डेलकर: इन्होंने कहा कि दलितों की समस्या संख्या की नहीं, बल्कि "सामाजिक कलंक और अलगाव" की है । "हमें हजारों साल तक दबाया गया है"।

 * अम्बेडकर की भूमिका: पहले पृथक निर्वाचिका चाहते थे, लेकिन विभाजन के बाद उन्होंने भी इसे छोड़ दिया।

 * परिणाम: अस्पृश्यता (Untouchability) का उन्मूलन, मंदिरों में प्रवेश का अधिकार और सरकारी नौकरियों/विधायिका में आरक्षण।

B. राज्य की शक्तियाँ: केंद्र बनाम राज्य (Powers of the State)

1. शक्तिशाली केंद्र के समर्थक:

 * नेहरू और अम्बेडकर: विभाजन और हिंसा को देखते हुए एक मजबूत केंद्र को जरूरी मानते थे।

 * बालकृष्ण शर्मा: देश की रक्षा और आर्थिक योजनाओं के लिए मजबूत केंद्र जरूरी है।

2. राज्यों के अधिकारों के समर्थक:

 * के. सन्तनम (K. Santhanam): इन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र के पास बहुत अधिक शक्तियाँ होंगी तो वह "बिखर जाएगा"। यदि राज्यों के पास पैसा (राजकोषीय शक्ति) नहीं होगा, तो वे विकास नहीं कर पाएंगे।

3. अंतिम निर्णय (Conclusion):

 * तीन सूचियाँ बनाई गईं: केंद्रीय सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची।

 * ज्यादातर महत्वपूर्ण विषय (खनिज, उद्योग) और कर (Tax) केंद्र के पास रखे गए।

 * अनुच्छेद 356: केंद्र को राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार दिया गया।

C. राष्ट्र की भाषा (National Language)

 * गाँधी जी के विचार: "हिन्दुस्तानी" (हिंदी + उर्दू का मिश्रण) राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए क्योंकि यह आम जनता की भाषा थी। लेकिन विभाजन के कारण हिंदी और उर्दू में दूरियाँ बढ़ गईं।

 * हिंदी का आक्रामक समर्थन (R.V. Dhulekar): धुलेकर ने कहा कि जो लोग हिंदुस्तानी नहीं जानते, उन्हें संविधान सभा से चले जाना चाहिए। वे हिंदी को "राष्ट्रभाषा" बनाना चाहते थे।

 * वर्चस्व का भय (श्रीमती जी. दुर्गाबाई): दक्षिण भारत की सदस्य। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंदी का आक्रामक प्रचार दक्षिण के लोगों में भय और विरोध पैदा कर रहा है।

 * समाधान (Language Committee):

   * हिंदी (देवनागरी लिपि) को "राजभाषा" (Official Language) घोषित किया गया, "राष्ट्रभाषा" नहीं।

   * अगले 15 साल तक सरकारी कार्यों के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल जारी रखने का फैसला हुआ।


6. संविधान की मुख्य विशेषताएँ (Key Features)

 * वयस्क मताधिकार (Adult Suffrage): बिना किसी भेदभाव के सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार। यह एक बहुत साहसिक कदम था क्योंकि पश्चिमी देशों में यह अधिकार बहुत संघर्ष के बाद मिला था।

 * धर्मनिरपेक्षता (Secularism): संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता के गुण नहीं गाए गए थे, लेकिन मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 25-28, 29-30) के जरिए इसे लागू किया गया।

 * दलितों और पिछड़ों के लिए आरक्षण: अस्पृश्यता का अंत और समानता का अधिकार।

महत्वपूर्ण कथन (Who Said What - For Exam)

| वक्ता | कथन/विचार | स्रोत संख्या |

| जवाहरलाल नेहरू | "हम सिर्फ नकल करने वाले नहीं हैं... शासन व्यवस्था हमारे लोगों के स्वभाव के अनुरूप होनी चाहिए।" | |

| सरदार पटेल | पृथक निर्वाचिका एक "विष है जो हमारे देश की राजनीति में समा चुका है।" | |

| गोविंद वल्लभ पंत | "पृथक निर्वाचिका अल्पसंख्यकों के लिए आत्मघाती साबित होगी।" | |

| सोमनाथ लाहिड़ी | "संविधान सभा ब्रिटिश बंदूकों के साये में है।" | |

| एन.जी. रंगा | "असली अल्पसंख्यक तो इस देश की जनता (गरीब) है।" | |

| के. सन्तनम | "शक्तियों का यह वितरण (मजबूत केंद्र) राज्यों को पंगु बना देगा।" | |

| आर.वी. धुलेकर | "जो लोग हिंदुस्तानी नहीं जानते... उन्हें चले जाना चाहिए।" | |

| महात्मा गाँधी | "हिन्दुस्तानी... न तो संस्कृतनिष्ठ हिंदी होनी चाहिए और न ही फ़ारसीनिष्ठ उर्दू।" | |

महत्वपूर्ण तिथियाँ (Timeline)

 * 1945-46: भारत में प्रांतीय चुनाव।

 * 9 दिसंबर 1946: संविधान सभा का अधिवेशन शुरू।

 * 13 दिसंबर 1946: नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया।

 * 15 अगस्त 1947: भारत को स्वतंत्रता मिली।

 * 29 अगस्त 1947: प्रारूप समिति का गठन (अम्बेडकर अध्यक्ष)।

 * 26 नवंबर 1949: संविधान बनकर तैयार हुआ और हस्ताक्षर किए गए।

 * 26 जनवरी 1950: संविधान लागू हुआ।


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