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Class 12 History & Arts
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Thursday, 8 January 2026

Class 12 History Chapter 7 Notes in Hindi | एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर | Vijayanagara Empire

 



अध्याय 7: एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर

​ (लगभग 14वीं से 16वीं सदी तक)

1. परिचय और खोज

​विजयनगर का शाब्दिक अर्थ है "विजय का शहर"। यह एक शहर और एक साम्राज्य दोनों का नाम था।

​स्थापना: 1336 ई. में दो भाइयों हरिहर और बुक्का ने की थी।

​विस्तार: यह उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था।

​हम्पी: 1565 में आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किए जाने के बाद यह शहर उजड़ गया। लोगों की यादों में यह 'हम्पी' नाम से जीवित रहा। यह नाम यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पा देवी के नाम से निकला है।

​1.1 हम्पी की खोज (कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी)

​कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी एक इंजीनियर और पुराविद थे। वे 1815 में भारत के पहले 'सर्वेयर जनरल' बने।

​उन्होंने 1800 ई. में हम्पी (विजयनगर) के खंडहरों को प्रकाश में लाया और इसका पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया।

​स्रोत: मैकेंज़ी ने अपनी जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पा देवी के पुरोहितों की स्मृतियों से जुटाई। बाद में छायाचित्रकारों (1856 से) और अभिलेखशास्त्रियों ने मंदिरों के सैकड़ों अभिलेखों को इकट्ठा किया।

2. राय, नायक और सुल्तान (राजनीतिक इतिहास)

​विजयनगर के शासक अपने आप को 'राय' कहते थे।

​2.1 शासक और व्यापार

​प्रतिद्वंद्वी: विजयनगर के राजाओं का संघर्ष उत्तर में दक्कन के सुल्तानों और उड़ीसा के गजपति शासकों के साथ होता था। यह संघर्ष उपजाऊ नदी घाटियों और विदेशी व्यापार पर नियंत्रण के लिए था।

​अश्व व्यापार: युद्ध कला घोड़ों पर निर्भर थी। इसलिए अरब और मध्य एशिया से घोड़ों का आयात बहुत महत्वपूर्ण था। शुरुआत में यह व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था, बाद में पुर्तगाली भी इसमें शामिल हो गए (जो अपनी बंदूक तकनीक के कारण शक्तिशाली थे)।

​2.2 राजवंशों का क्रम

​संगम वंश: (पहला राजवंश, 1485 तक)।

​सलुव वंश: (सैनिक कमांडर, 1503 तक)।

​तुलुव वंश: (कृष्णदेव राय इसी वंश के थे)।

​अराविदु वंश: (अंत में सत्ता इनके हाथ में आई)।

​2.3 कृष्णदेव राय (शासन: 1509-1529)

​ये विजयनगर के सर्वश्रेष्ठ शासक माने जाते हैं।

​विस्तार: उन्होंने तुंगभद्रा और कृष्णा नदी के बीच के क्षेत्र (रायचूर दोआब) को हासिल किया (1512), उड़ीसा के शासकों को हराया (1514) और बीजापुर के सुल्तान को पराजित किया (1520)।

​शांति और समृद्धि: उनके काल में बेहतरीन मंदिरों का निर्माण हुआ और कई भव्य गोपुरम (प्रवेश द्वार) बनवाए गए। उन्होंने अपनी माँ के नाम पर नगलपुरम नामक उपनगर बसाया।

​साहित्य: उन्होंने तेलुगु भाषा में राजनीति पर एक ग्रंथ 'अमुक्तमाल्यद' लिखा।

​2.4 पतन और तालीकोटा का युद्ध (1565)

​कृष्णदेव राय की मृत्यु (1529) के बाद शाही ढांचे में तनाव आ गया।

​1565 में (राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध): विजयनगर की सेना का नेतृत्व राम राय कर रहे थे। बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं ने विजयनगर को बुरी तरह हराया।

​शहर को लूटा गया और पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। राजधानी को बाद में पूर्व की ओर (पेनुकोंडा और चंद्रगिरी) स्थानांतरित किया गया।

​2.5 अमर-नायक प्रणाली (Amar-Nayaka System)

​यह विजयनगर की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी। यह संभवतः दिल्ली सल्तनत की 'इक्ता' प्रणाली से ली गई थी।

​कौन थे: अमर-नायक सैनिक कमांडर होते थे जिन्हें राय (राजा) प्रशासन के लिए राज्यक्षेत्र (Territory) देते थे।

​कार्य: वे किसानों और व्यापारियों से कर वसूलते थे। इसका एक हिस्सा वे अपने खर्च और घोड़ों/हाथियों के दल के लिए रखते थे और शेष राजा को देते थे।

​नियंत्रण: राजा उन पर नियंत्रण रखने के लिए उनका तबादला (Transfer) करता रहता था। लेकिन 17वीं सदी में कई नायकों ने अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिए, जिससे केंद्रीय ढांचा विघटित हो गया।


3. जल संपदा और किलेबंदी

​विजयनगर अपनी भौगोलिक स्थिति और किलेबंदी के लिए प्रसिद्ध था।

​3.1 जल प्रबंधन

​विजयनगर प्राकृतिक रूप से एक कुंड (Basin) जैसा था जहाँ तुंगभद्रा नदी बहती थी।

​कमलापुरम जलाशय: 15वीं सदी में बनाया गया। इससे न केवल खेतों की सिंचाई होती थी, बल्कि इसे एक नहर के माध्यम से 'राजकीय केंद्र' तक भी ले जाया गया था।

​हिरिया नहर: यह नहर तुंगभद्रा पर बने बांध से पानी लाकर 'धार्मिक केंद्र' और शहरी क्षेत्र को अलग करने वाली घाटी को सिंचित करती थी।

​3.2 किलेबंदी (Fortification)

​फारस के राजदूत अब्दुल रज्जाक (15वीं सदी) यहाँ की किलेबंदी देखकर हैरान रह गया।

​सात दीवारें: उसने लिखा कि किले की सात पंक्तियाँ थीं।

​खेतों की घेराबंदी: सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि किलेबंदी सिर्फ शहर की नहीं, बल्कि खेतों और जंगलों की भी की गई थी।

​कारण: मध्यकालीन युद्धों में दुश्मन खाद्य सामग्री रोककर शहर को भूखा मारते थे। विजयनगर के शासकों ने कृषि क्षेत्र को किले के अंदर लेकर इस नीति को विफल करने का प्रयास किया।

​चिनाई: दीवारों में गारे या सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया था। पत्थर के टुकड़े (फन्निदार/Wedge shaped) एक-दूसरे को फंसाकर टिकाए गए थे।

4. शहरी केंद्र और रॉयल सेंटर

​4.1 शहरी केंद्र (Urban Core)

​यहाँ सामान्य लोगों के आवास थे।

​पुरातत्वविदों को यहाँ चीनी मिट्टी के बर्तन मिले हैं, जो अमीर व्यापारियों (शायद मुस्लिम) की उपस्थिति का संकेत देते हैं। यहाँ कई मकबरे और मस्जिदें भी हैं।

​पुर्तगाली यात्री बारबोसा ने बताया कि लोगों के आवास छप्पर के थे लेकिन मजबूत थे।

​4.2 राजकीय केंद्र (Royal Center)

​यह शहर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित था। इसमें 60 से अधिक मंदिर थे। यहाँ दो प्रमुख मंच (Platform) मिले हैं:

​महानवमी डिब्बा:

​यह एक विशाल मंच है (11,000 वर्ग फीट आधार और 40 फीट ऊँचाई)।

​अनुष्ठान: यहाँ सितंबर-अक्टूबर में दशहरा (महानवमी) के अवसर पर भव्य अनुष्ठान होते थे। राजा अपनी ताकत, सेना और रूतबे का प्रदर्शन करता था। नायक यहाँ राजा को भेंट देते थे।

​सभा मंडप: यह एक ऊँचा मंच था जिसमें पास-पास लकड़ी के स्तंभों के लिए छेद बने हुए थे।

​अन्य भवन:

​लोटस महल: यह राजकीय केंद्र का सबसे सुंदर भवन है। मैकेंज़ी ने इसे यह नाम दिया था। यह संभवतः एक परिषद् सदन (Council Chamber) था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था।

​हज़ार राम मंदिर: यह संभवतः केवल राजा और उसके परिवार के लिए था। इसकी दीवारों पर रामायण के दृश्य उकेरे गए हैं।

5. धार्मिक केंद्र (Sacred Center)

​यह तुंगभद्रा नदी के चट्टानी उत्तरी भाग में स्थित था।

​मान्यताएँ: यह क्षेत्र सुग्रीव और बाली (रामायण) के वानर राज्य 'किष्किन्धा' के रूप में जाना जाता था। यह स्थानीय देवी पम्पा देवी (पार्वती) का स्थान भी था जिन्होंने यहाँ विरुपाक्ष (शिव) से विवाह के लिए तपस्या की थी।

​विजयनगर के राजा भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे और राजसी आदेशों पर "श्री विरुपाक्ष" (कन्नड़ लिपि में) अंकित करते थे।

​5.1 मंदिर स्थापत्य की विशेषताएँ

​विजयनगर शैली में विशालता और भव्यता थी।

​गोपुरम: ये मंदिरों के विशाल प्रवेश द्वार थे जो केंद्रीय देवालय की मीनारों को बौना साबित कर देते थे। यह शाही ताकत का प्रतीक था। कृष्णदेव राय ने विरुपाक्ष मंदिर के सामने मुख्य गोपुरम बनवाया।

​मंडप: मंदिरों में लंबे स्तंभों वाले गलियारे और मंडप होते थे। इनका उपयोग देवताओं के विवाह, संगीत, नृत्य या झूला झुलाने के लिए होता था।

​विट्ठल मंदिर: यहाँ के प्रमुख देवता विट्ठल (विष्णु का रूप) थे, जो मूल रूप से महाराष्ट्र के पूजनीय थे। यह विजयनगर की संस्कृति के समावेशी चरित्र को दर्शाता है।

​इसकी विशेषता रथ-गलियां (Chariot streets) और पत्थर का बना हुआ रथ (Stone Chariot) है।

6. निष्कर्ष: महलों और मंदिरों का अध्ययन

​1976 में हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल घोषित किया गया। लगभग 20 वर्षों तक दुनिया भर के विद्वानों ने यहाँ की सतह का इंच-दर-इंच सर्वेक्षण किया और हजारों संरचनाओं को मानचित्र पर दर्ज किया। जॉन एम. फ्रिट्ज और जॉर्ज मिशेल जैसे विद्वानों ने इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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