Study Image
Class 12 Study Material
Bookshelf

Sunday, 11 January 2026

Class 12 Geography Chapter 4 Notes in Hindi | जल-संसाधन (Notes + Important Questions) 2026

 

अध्याय 4: जल-संसाधन


1. परिचय

 * जल एक चक्रीय संसाधन है और पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। पृथ्वी का लगभग 71% धरातल पानी से ढका है, लेकिन अलवणीय (ताजा) जल केवल 3% है ।

 * बढ़ती मांग, अति उपयोग और प्रदूषण के कारण जल का अभाव 21वीं सदी की बड़ी चुनौती है।


2. भारत के जल संसाधन: एक नज़र में

भारत की वैश्विक स्थिति:

 * क्षेत्रफल: विश्व का 2.45%।

 * जल संसाधन: विश्व का 4%।

 * जनसंख्या: विश्व की लगभग 17.5%।

जल की उपलब्धता के आँकड़े:

 * कुल वार्षिक वर्षण (Rainfall): लगभग 4,000 घन कि.मी.।

 * कुल उपलब्ध जल (धरातलीय + भौम जल): 1,869 घन कि.मी.।

 * कुल उपयोगी जल: केवल 1,122 घन कि.मी. (60% ही उपयोग योग्य है) ।


3. जल संसाधनों का वर्गीकरण

A. धरातलीय जल संसाधन (Surface Water Resources):

 * स्रोत: नदियाँ, झीलें, तालाब और तलैया।

 * भारत में 10,360 नदियाँ (1.6 कि.मी. से लंबी) हैं।

 * उपयोगिता: कुल धरातलीय जल का केवल 32% (690 घन कि.मी.) ही उपयोग किया जा सकता है ।

 * वितरण: गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों के जलग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े हैं और इनमें देश के कुल धरातलीय जल का 60% भाग पाया जाता है ।

 * B. भौम जल संसाधन (Groundwater Resources):

 * देश में कुल पुनः पूर्तियोग्य भौम जल लगभग 432 घन कि.मी. है।

 * उपयोग का स्तर:

   * अत्यधिक उपयोग: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और तमिलनाडु।

   * मध्यम उपयोग: गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा और महाराष्ट्र।

   * कम उपयोग: छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल (यहाँ क्षमता अभी बची है)।

C. लैगून और पश्च जल (Lagoons and Backwaters):

 * केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में समुद्र तट दंतुरित होने के कारण लैगून और झीलें बनी हैं।

 * उपयोग: खारे जल का उपयोग मछली पालन, नारियल और चावल की सिंचाई के लिए होता है।


4. जल की माँग और उपयोग (Water Demand and Usage)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए जल का सर्वाधिक उपयोग कृषि में होता है।

सेक्टर-वार जल उपयोग:

 * कृषि (सिंचाई):

   * धरातलीय जल का 89%।

   * भौम जल का 92%।

 * घरेलू सेक्टर:

   * धरातलीय जल का 9%।

   * भौम जल का 3%।

 * औद्योगिक सेक्टर:

   * धरातलीय जल का 2%।

   * भौम जल का 5%।


5. सिंचाई के लिए जल की माँग

सिंचाई की आवश्यकता के कारण:

 * वर्षा की अनिश्चितता: देश के अधिकांश भाग वर्षाविहीन और सूखाग्रस्त हैं (जैसे- उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन का पठार)।

 * फसलों की प्रकृति: चावल, गन्ना, जूट जैसी फसलों को अत्यधिक जल चाहिए।

 * उत्पादकता बढ़ाना: सिंचित भूमि की उत्पादकता असिंचित भूमि से अधिक होती है।

 * हरित क्रांति: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति की सफलता सिंचाई (नलकूपों/कुओं) पर ही आधारित थी ।

   * पंजाब में 76.1% और हरियाणा में 51.3% क्षेत्र कुओं/नलकूपों द्वारा सिंचित है।

सिंचाई के नकारात्मक प्रभाव:

 * भौम जल स्तर का गिरना।

 * महाराष्ट्र और राजस्थान में फ्लुओराइड का संकेंद्रण बढ़ गया है।

 * पश्चिम बंगाल और बिहार में संखिया (Arsenic) का संकेंद्रण बढ़ गया है।

 * मृदा में लवणता बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY):

 * शुरुआत: 2015-16।

 * उद्देश्य: 'हर खेत को पानी', जल का कुशल उपयोग ('प्रति बूँद अधिक फसल'), और वर्षा पोषित क्षेत्रों का विकास ।


6. जल गुणवत्ता और प्रदूषण

 * जल प्रदूषण: सूक्ष्म जीवों, रसायनों और औद्योगिक अपशिष्टों के मिलने से जल मानव उपयोग के योग्य नहीं रहता ।

 * प्रदूषित नदियाँ: गंगा और यमुना सबसे अधिक प्रदूषित हैं ,यमुना (दिल्ली से इटावा के बीच) देश की सबसे प्रदूषित नदी है।

   * अन्य प्रदूषित नदियाँ: साबरमती (अहमदाबाद), गोमती (लखनऊ), मूसी (हैदराबाद), और गंगा (कानपुर व वाराणसी)।

 * संवैधानिक विफलता: जल अधिनियम 1974 और पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986 का प्रभावी कार्यान्वयन नहीं हुआ है।


7. जल संरक्षण और प्रबंधन (Water Conservation and Management)

A. जल का पुनः चक्र और पुनः उपयोग (Recycle and Reuse):

 * शोधित अपशिष्ट जल (Treated wastewater) का उपयोग उद्योगों में शीतलन, अग्निशमन, और बागवानी के लिए किया जा सकता है ।

 * इससे पीने योग्य अच्छी गुणवत्ता वाले जल का संरक्षण होगा।

B. जल संभर प्रबंधन (Watershed Management):

 * अर्थ: धरातलीय और भौम जल संसाधनों का दक्ष प्रबंधन (रोकना, संचयन, पुनर्भरण)।

 * उद्देश्य: प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना।

 * प्रमुख कार्यक्रम:

   * हरियाली (Haryali): केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित। उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण (पीने, सिंचाई, मत्स्य पालन के लिए)।

   * नीरू-मीरू (जल और आप): आंध्र प्रदेश में।

   * अरवारी पानी संसद: अलवर, राजस्थान में (जोहड़ और रोक बाँध बनाए गए)।

   * अनिवार्यता: तमिलनाडु में घरों में जल संग्रहण संरचना बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।

 * अटल भूजल योजना (अटल जल): 7 राज्यों (गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, म.प्र., महाराष्ट्र, राजस्थान, उ.प्र.) के जल की कमी वाले क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी से जल प्रबंधन के लिए शुरू की गई ।

C. केस स्टडी: रालेगॅन सिद्धि (महाराष्ट्र)

 * अहमदनगर जिले का एक गाँव जो कभी गरीबी और शराब के जाल में था ।

 * उपाय: सेवानिवृत्त सेनाकर्मी (अन्ना हजारे) के नेतृत्व में जल-संभर विकास।

 * कार्य: स्वैच्छिक श्रम (Shramdaan), नशबंदी, खुला चराई पर रोक, और दहेज प्रथा का विरोध ।

 * परिणाम: पानी की उपलब्धता बढ़ी, कृषि फली-फूली, और गाँव आत्मनिर्भर बना। अब यहाँ पानी की कमी वाली फसलें (दालें, तिलहन) उगाई जाती हैं।

D. वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting):

 * परिभाषा: वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की विधि।

 * लाभ: पानी की उपलब्धता बढ़ती है, भूमिगत जल स्तर ऊँचा उठता है, मृदा अपरदन रुकता है, और ऊर्जा की बचत होती है।

 * पारंपरिक विधियाँ:

   * झीलों, तालाबों में संचयन।

   * टाँका/कुंड: राजस्थान में वर्षा जल एकत्र करने के लिए बनाए गए भूमिगत टैंक।


8. राष्ट्रीय जल नीति, 2012

इस नीति की मुख्य विशेषताएँ:

 * पेयजल, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता।

 * जल का आर्थिक मूल्यांकन करना ताकि संरक्षण को बढ़ावा मिले।

 * जलवायु परिवर्तन के अनुसार अनुकूलन रणनीतियाँ बनाना।

 * जल ऑडिटिंग और जल पदचिन्ह (Water Footprint) जैसे बेंचमार्क विकसित करना।


9. जल क्रांति अभियान (2015-16)

 * उद्देश्य: प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

 * गतिविधियाँ:

   * जल ग्राम: देश के 672 जिलों में से प्रत्येक में एक जल की कमी वाले गाँव को 'जल ग्राम' के रूप में चुनना।

   * 1000 हेक्टेयर का मॉडल कमांड क्षेत्र बनाना।

   * प्रदूषण कम करना (आर्सेनिक मुक्त कुओं का निर्माण)।

   * जन जागरूकता फैलाना।





महत्त्वपूर्ण प्रश्न 



1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)


प्रश्न 1: भारत में विश्व के जल संसाधनों का लगभग कितना प्रतिशत भाग पाया जाता है?

(क) 2.45 प्रतिशत

(ख) 4 प्रतिशत

(ग) 17 प्रतिशत

(घ) 10 प्रतिशत

उत्तर: (ख) 4 प्रतिशत


प्रश्न 2: निम्नलिखित में से किस सेक्टर में जल का उपयोग (धरातलीय और भौम जल दोनों में) सर्वाधिक होता है?

(क) औद्योगिक सेक्टर

(ख) घरेलू सेक्टर

(ग) कृषि सेक्टर

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (ग) कृषि सेक्टर

(नोट: कृषि में धरातलीय जल का 89% और भौम जल का 92% उपयोग होता है)


प्रश्न 3: देश में सबसे अधिक प्रदूषित नदी कौन-सी मानी गई है (विशेषकर दिल्ली और इटावा के बीच)?

(क) गंगा

(ख) साबरमती

(ग) यमुना

(घ) गोमती

उत्तर: (ग) यमुना


प्रश्न 4: 'नीरू-मीरू' (जल और आप) कार्यक्रम किस राज्य से संबंधित है?

(क) राजस्थान

(ख) आंध्र प्रदेश

(ग) महाराष्ट्र

(घ) तमिलनाडु

उत्तर: (ख) आंध्र प्रदेश


2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)


 * भारत में कुल उपयोगी जल संसाधन ________ घन कि.मी. है।

 उत्तर: 1,122


 * पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ भागों में भौम जल में ________ (Arsenic) के संकेंद्रण की वृद्धि हो गई है।

 उत्तर: संखिया


 * राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण ढाँचे को ________ अथवा टाँका के नाम से जाना जाता है।

 उत्तर: कुंड


 * भारत सरकार द्वारा 'जल क्रांति अभियान' वर्ष ________ में आरंभ किया गया था।

 उत्तर: 2015-16


3. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न (Very Short Answer Questions)


प्रश्न 1: जल संभर प्रबंधन (Watershed Management) का मुख्य तात्पर्य क्या है?

उत्तर: जल संभर प्रबंधन का तात्पर्य मुख्य रूप से धरातलीय और भौम जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन (संचयन और पुनर्भरण) से है ।


प्रश्न 2: भारत के किन राज्यों में भौम जल (Groundwater) का उपयोग बहुत अधिक होता है? (कोई दो राज्य बताएँ)

उत्तर: पंजाब, हरियाणा (तथा राजस्थान और तमिलनाडु)।


प्रश्न 3: 'हरियाली' (Haryali) क्या है?

उत्तर: 'हरियाली' केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनसंख्या को जल संरक्षण के लिए योग्य बनाना है।


प्रश्न 4: लैगून और पश्च जल (Backwaters) का उपयोग मुख्य रूप से किन कार्यों के लिए किया जाता है?

उत्तर: इनका उपयोग मछली पालन और चावल की कुछ किस्मों व नारियल की सिंचाई के लिए किया जाता है।


4. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)


प्रश्न 1: भारत में सिंचाई की आवश्यकता क्यों है? इसके कारणों की विवेचना कीजिए।

उत्तर:  भारत में कृषि के लिए सिंचाई अति आवश्यक है, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

* वर्षा की असमानता: देश में वर्षा के स्थानिक और सामयिक वितरण में बहुत असमानता है। देश के अधिकांश भाग (जैसे उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन का पठार) वर्षाविहीन या सूखाग्रस्त रहते हैं ।

* फसलों की प्रकृति: कुछ फसलों जैसे चावल, गन्ना और जूट के लिए अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है, जो केवल वर्षा से पूरी नहीं हो सकती。

* उत्पादकता बढ़ाना: सिंचित भूमि की कृषि उत्पादकता असिंचित भूमि की अपेक्षा अधिक होती है。

* बहुफसलीकरण: सिंचाई की व्यवस्था होने से वर्ष भर में एक से अधिक फसलें उगाना संभव हो पाता है।

* हरित क्रांति: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि विकास की सफलता का मुख्य आधार सिंचाई (विशेषकर नलकूपों द्वारा) ही है ।


प्रश्न 2: वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting) क्या है और इसके क्या लाभ हैं?

उत्तर:  परिभाषा: वर्षा जल संग्रहण विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की विधि है। इसका उपयोग भूमिगत जलभृतों (aquifers) के पुनर्भरण के लिए भी किया जाता है ।

वर्षा जल संग्रहण के लाभ:

 * जल उपलब्धता: यह पानी की उपलब्धता को बढ़ाता है।

* भौम जल स्तर: यह भूमिगत जल स्तर को नीचे गिरने से रोकता है और उसे ऊपर उठाता है।

* गुणवत्ता में सुधार: यह फ्लुओराइड और नाइट्रेट्स जैसे संदूषकों को कम करके भूमिगत जल की गुणवत्ता बढ़ाता है (अवमिश्रण द्वारा)।

 * ऊर्जा की बचत: भौम जल स्तर ऊपर उठने से ट्यूबवेल से पानी निकालने में कम ऊर्जा लगती है।

* मृदा अपरदन व बाढ़: यह मृदा अपरदन और बाढ़ को रोकने में सहायक है।

* तटीय क्षेत्रों में: यह लवणीय जल (खारे पानी) के प्रवेश को रोकता है।


प्रश्न 3: भारत में जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों (जैसे जल संभर प्रबंधन) पर एक लेख लिखें।

उत्तर:  जल की घटती उपलब्धता और बढ़ती मांग को देखते हुए संरक्षण आवश्यक हो गया है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

* जल संभर प्रबंधन (Watershed Management):

* इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है।

* हरियाली परियोजना: केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई योजना, जो ग्राम पंचायतों के सहयोग से पीने और सिंचाई के लिए जल संरक्षण करती है ।

* नीरू-मीरू (आंध्र प्रदेश) और अरवारी पानी संसद (राजस्थान): इन कार्यक्रमों में लोगों के सहयोग से तालाबों और रोक बाँधों (Check dams) की खुदाई की गई है।

* अटल भूजल योजना: यह 7 राज्यों के जल की कमी वाले क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन के लिए शुरू की गई है ।

* सफल उदाहरण (रालेगॅन सिद्धि): महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में अन्ना हजारे के नेतृत्व में जल संभर विकास ने एक गरीब गाँव को समृद्ध बना दिया। यहाँ स्वैच्छिक श्रम और नशबंदी जैसे सामाजिक बदलावों के साथ जल संरक्षण किया गया।

* कानूनी उपाय: तमिलनाडु में घरों में जल संग्रहण संरचना बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।




No comments:

Post a Comment