Class 12 Study Material
History (इतिहास)
Book 1: भारतीय इतिहास के कुछ विषय - I
Chapter 1: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ Chapter 2: राजा, किसान और नगर Chapter 3: बंधुत्व, जाति तथा वर्ग Chapter 4: विचारक, विश्वास और इमारतें
Book 2: भारतीय इतिहास के कुछ विषय - II
Chapter 5: यात्रियों के नज़रिए Chapter 6: भक्ति-सूफ़ी परंपराएँ Chapter 7: एक साम्राज्य की राजधानी Chapter 8: किसान, ज़मींदार और राज्य
Book 3: भारतीय इतिहास के कुछ विषय - III
Chapter 9: उपनिवेशवाद और देहात Chapter 10: उपनिवेशवाद और देहात Chapter 11: विद्रोही और राज Chapter 12: संविधान का निर्माण
Geography (भूगोल)
Book: भारत: लोग और अर्थव्यवस्था
Chapter 1: जनसंख्या वितरण... Chapter 2: मानव बस्तियाँ Chapter 3: भू-संसाधन तथा कृषि Chapter 4: जल-संसाधन Chapter 5: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन Chapter 6: भारत के संदर्भ में नियोजन Chapter 7: परिवहन तथा संचार Chapter 8: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Chapter 9: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में...
Book: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत
Chapter 1: मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र Chapter 2: विश्व जनसंख्या – वितरण, घनत्व Chapter 3: मानव विकास

Wednesday

​Class 12 Geography Chapter 3 Notes in Hindi: भू-संसाधन तथा कृषि | 2026 Exam

 

अध्याय 3: मानव विकास (Human Development)



1. वृद्धि और विकास (Growth and Development)

अक्सर 'वृद्धि' और 'विकास' शब्दों का प्रयोग एक ही अर्थ में किया जाता है, लेकिन इनमें आधारभूत अंतर है:

 * वृद्धि (Growth):

   * यह मात्रात्मक (Quantitative) होती है और मूल्य निरपेक्ष होती है।

   * इसका चिह्न धनात्मक (+) या ऋणात्मक (-) दोनों हो सकता है।

   * उदाहरण: यदि किसी नगर की जनसंख्या 1 लाख से 2 लाख हो जाए, तो यह 'वृद्धि' है।

 * विकास (Development):

   * यह गुणात्मक (Qualitative) होता है और मूल्य सापेक्ष होता है।

   * विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक वर्तमान दशाओं में सकारात्मक (Positive) बदलाव न हो।

   * उदाहरण: यदि जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ आवास, जल और मूलभूत सुविधाओं में भी सुधार हो, तो उसे 'विकास' कहा जाएगा।


2. मानव विकास की अवधारणा

इस अवधारणा का प्रतिपादन पाकिस्तानी अर्थशास्त्री डॉ. महबूब-उल-हक द्वारा किया गया था।

 * परिभाषा: मानव विकास एक ऐसा विकास है जो लोगों के विकल्पों में वृद्धि करता है और उनके जीवन स्तर में सुधार लाता है।

 * केंद्र बिंदु: इस अवधारणा में विकास का केंद्र बिंदु 'मनुष्य' है।

 * उद्देश्य: ऐसी दशाएँ उत्पन्न करना जिनमें लोग 'सार्थक जीवन' (Meaningful Life) जी सकें।

 * सार्थक जीवन: इसका अर्थ केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण जीवन है। लोग स्वस्थ हों, अपनी बुद्धि का विकास कर सकें, और समाज में प्रतिभागिता कर सकें।

 * योगदान: नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अमर्त्य सेन ने भी विकास का मुख्य ध्येय 'स्वतंत्रता में वृद्धि' (या परतंत्रता में कमी) को माना। उन्होंने 'क्षमता उपागम' पर जोर दिया।


3. मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र

मानव विकास के लिए लोगों के विकल्पों में वृद्धि करना आवश्यक है। इसके तीन प्रमुख पक्ष हैं:

 * दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन जीना (स्वास्थ्य)।

 * ज्ञान प्राप्त करना (शिक्षा)।

 * एक शिष्ट जीवन जीने के लिए पर्याप्त साधनों का होना (संसाधनों तक पहुँच)।


4. मानव विकास के चार स्तंभ (Four Pillars)

मानव विकास का विचार चार प्रमुख संकल्पनाओं पर टिका है:

 * समता (Equity):

   * प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना।

   * लोगों के साथ लिंग, प्रजाति, आय या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

 * सतत पोषणीयता (Sustainability):

   * अवसरों की उपलब्धता में निरंतरता।

   * संसाधनों का उपयोग भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए ताकि उनके अवसर समाप्त न हों।

 * उत्पादकता (Productivity):

   * यहाँ इसका अर्थ 'मानव श्रम उत्पादकता' है।

   * लोगों की क्षमताओं का निर्माण करके उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना, क्योंकि जन-समुदाय ही राष्ट्र का वास्तविक धन है।

 * सशक्तीकरण (Empowerment):

   * अपने विकल्प चुनने के लिए शक्ति प्राप्त करना।

   * यह शक्ति बढ़ती हुई स्वतंत्रता और क्षमता से आती है। इसके लिए सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों की आवश्यकता होती है।


5. मानव विकास के उपागम (Approaches)

मानव विकास को देखने के चार प्रमुख तरीके हैं:

 * आय उपागम: यह सबसे पुराना उपागम है। इसमें माना जाता है कि आय का स्तर ऊँचा होने पर मानव विकास का स्तर भी ऊँचा होगा।

 * कल्याण उपागम: यह मानव को सभी विकासात्मक गतिविधियों के 'लाभार्थी' के रूप में देखता है। सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुख-साधनों पर अधिकतम व्यय करना चाहिए।

 * न्यूनतम आवश्यकता उपागम: इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्रस्तावित किया था। इसमें 6 न्यूनतम आवश्यकताओं की पहचान की गई: स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और आवास।

 * क्षमता उपागम: इसका संबंध प्रो. अमर्त्य सेन से है। संसाधनों तक पहुँच के क्षेत्रों में 'मानव क्षमताओं' का निर्माण करना ही विकास की कुंजी है।


6. मानव विकास का मापन

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 1990 से प्रतिवर्ष 'मानव विकास प्रतिवेदन' प्रकाशित करता है।

A. मानव विकास सूचकांक (HDI):

 * यह मापन स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच के आधार पर देशों को 0 से 1 के बीच स्कोर देता है।

   * स्वास्थ्य: इसका मापक 'जन्म के समय जीवन प्रत्याशा' है।

   * शिक्षा: इसमें 'प्रौढ़ साक्षरता दर' और 'सकल नामांकन अनुपात' को देखा जाता है।

   * संसाधनों तक पहुँच: इसे 'क्रय शक्ति' (अमेरिकी डॉलर) में मापा जाता है।

 * प्रत्येक आयाम को 1/3 भार दिया जाता है। स्कोर 1 के जितना करीब होगा, मानव विकास उतना ही अधिक होगा।

B. मानव गरीबी सूचकांक (HPI):

 * यह सूचकांक मानव विकास में 'कमी' को मापता है।

 * इसमें 40 वर्ष की आयु तक जीवित न रह पाने की संभावना, प्रौढ़ निरक्षरता, स्वच्छ जल की कमी और अल्पभार वाले बच्चों की संख्या को गिना जाता है।

7. अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ

 * क्षेत्र का आकार और आय: किसी देश के आकार या प्रति व्यक्ति आय का मानव विकास से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। कई बार छोटे और कम अमीर देश (जैसे- श्रीलंका, केरल राज्य) बड़े और अमीर देशों (जैसे- भारत के पंजाब/गुजरात) से बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

 * सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH): भूटान विश्व का एकमात्र देश है जिसने इसे आधिकारिक माप घोषित किया है। यह मानता है कि प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति नहीं की जा सकती।

देशों का वर्गीकरण (मानव विकास स्कोर के आधार पर):

 * अति उच्च (0.800 से ऊपर): 69 देश। (उदाहरण: स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड)। ये देश सामाजिक खंड (शिक्षा/स्वास्थ्य) में बहुत निवेश करते हैं।

 * उच्च (0.700 - 0.799): 49 देश।

 * मध्यम (0.550 - 0.699): 42 देश। इसमें वे देश हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उभरे। भारत इसी वर्ग में आता है।

 * निम्न (0.550 से नीचे): 33 देश। ये देश अक्सर राजनीतिक उपद्रव, गृहयुद्ध, अकाल या बीमारियों से जूझ रहे होते हैं।

निष्कर्ष: मानव विकास के उच्च स्तर वाले देश सामाजिक सेक्टर में अधिक निवेश करते हैं और राजनीतिक रूप से स्थिर होते हैं, जबकि निम्न स्तर वाले देश प्रतिरक्षा (defense) पर अधिक खर्च करते हैं और अस्थिरता का सामना करते हैं।



महत्वपूर्ण प्रश्न



1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)


प्रश्न 1: मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन सबसे पहले किस विद्वान ने किया था?

(क) प्रो. अमर्त्य सेन

(ख) डॉ. महबूब-उल-हक

(ग) एलन सी. सैंपल

(घ) रैटजेल

उत्तर: (ख) डॉ. महबूब-उल-हक


प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन-सा देश 'सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता' (Gross National Happiness) को देश की प्रगति का आधिकारिक माप मानता है?

(क) भारत

(ख) चीन

(ग) भूटान

(घ) नेपाल

उत्तर: (ग) भूटान


प्रश्न 3: मानव विकास सूचकांक (HDI) में स्वास्थ्य का मापन किस आधार पर किया जाता है?

(क) साक्षरता दर

(ख) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा

(ग) प्रति व्यक्ति आय

(घ) लोगों की क्रय शक्ति

उत्तर: (ख) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा


प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है?

(क) आकार में वृद्धि

(ख) गुणों में धनात्मक परिवर्तन

(ग) आकार में स्थिरता

(घ) गुणों में साधारण बदलाव

उत्तर: (ख) गुणों में धनात्मक परिवर्तन


2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)


 * विकास का मूल उद्देश्य ऐसी दशाओं को उत्पन्न करना है जिनमें लोग ________ जीवन व्यतीत कर सकें।

   उत्तर: सार्थक (Meaningful)

 * मानव विकास प्रतिवेदन (Human Development Report) प्रतिवर्ष ________ द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

   उत्तर: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)

 * क्षमता उपागम (Capability Approach) का संबंध प्रो. ________ से है।

   उत्तर: अमर्त्य सेन

 * संसाधनों तक पहुँच को ________ के संदर्भ में मापा जाता है।

   उत्तर: क्रय शक्ति (अमेरिकी डॉलर में)


3. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न (Very Short Answer Questions)


प्रश्न 1: 'वृद्धि' और 'विकास' में एक मुख्य अंतर बताइए।

उत्तर: वृद्धि मात्रात्मक (Quantitative) होती है और इसका मान धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है, जबकि विकास गुणात्मक (Qualitative) होता है और यह हमेशा सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।


प्रश्न 2: मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-से हैं?

उत्तर: स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच।


प्रश्न 3: मानव विकास के चार स्तंभों के नाम लिखिए।

उत्तर: समता (Equity), सतत पोषणीयता (Sustainability), उत्पादकता (Productivity) और सशक्तीकरण (Empowerment)।


प्रश्न 4: किस संस्था ने 'न्यूनतम आवश्यकता उपागम' को प्रस्तावित किया था?

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने।


4. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)


प्रश्न 1: मानव विकास के चार स्तंभों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर:  मानव विकास का विचार चार प्रमुख स्तंभों पर टिका हुआ है, जो निम्नलिखित हैं:

 * समता (Equity): इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, लिंग या आय वर्ग का हो, विकास के समान अवसर मिलने चाहिए। अवसरों की उपलब्धता में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

 * सतत पोषणीयता (Sustainability): इसका मतलब है कि अवसरों की उपलब्धता लगातार बनी रहनी चाहिए। हमें संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह करना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधन बचे रहें। किसी भी संसाधन का दुरुपयोग भविष्य के अवसरों को कम कर देगा।

 * उत्पादकता (Productivity): यहाँ इसका अर्थ 'मानव श्रम की उत्पादकता' से है। लोगों को बेहतर चिकित्सा और शिक्षा देकर उनकी कार्यक्षमता बढ़ानी चाहिए, क्योंकि जन-समुदाय ही किसी देश का असली धन होता है।

 * सशक्तीकरण (Empowerment): इसका अर्थ है अपने विकल्प चुनने के लिए शक्ति प्राप्त करना। यह शक्ति बढ़ती हुई स्वतंत्रता और क्षमता से आती है। सुशासन और लोक-कल्याणकारी नीतियां लोगों को सशक्त बनाने में मदद करती हैं।


प्रश्न 2: मानव विकास के विभिन्न उपागमों (Approaches) की विवेचना कीजिए।

उत्तर:  मानव विकास को समझने और मापने के कई तरीके या उपागम हैं:

 * आय उपागम: यह सबसे पुराना तरीका है। इसमें माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की आय अधिक है, तो उसका विकास स्तर भी ऊँचा होगा। आय को स्वतंत्रता के स्तर के रूप में देखा जाता है।

 * कल्याण उपागम: यह उपागम मनुष्य को सभी विकास गतिविधियों के 'लाभार्थी' के रूप में देखता है। इसमें सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने की वकालत की जाती है।

 * न्यूनतम आवश्यकता उपागम: इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने दिया था। इसमें 6 बुनियादी जरूरतों की पहचान की गई - स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और आवास।

 * क्षमता उपागम: यह प्रो. अमर्त्य सेन द्वारा दिया गया। इसके अनुसार, संसाधनों तक पहुँचने के लिए लोगों की 'क्षमताओं' को बढ़ाना ही विकास की कुंजी है।


प्रश्न 3: वृद्धि और विकास के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए। क्या सकारात्मक वृद्धि से सदैव विकास होता है?

उत्तर:  अक्सर हम वृद्धि और विकास को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन भूगोल में इनका अर्थ अलग है:

 * वृद्धि (Growth): यह मात्रात्मक होती है। इसे मापा जा सकता है और यह मूल्य-निरपेक्ष होती है। इसका मतलब है कि वृद्धि धनात्मक (बढ़ना) भी हो सकती है और ऋणात्मक (घटना) भी। जैसे- जनसंख्या का बढ़ना या घटना।

 * विकास (Development): यह गुणात्मक होता है। इसका मतलब है गुणवत्ता में सुधार आना। विकास हमेशा सकारात्मक होता है। यह तब तक नहीं हो सकता जब तक मौजूदा हालात में कोई 'सुधार' न हो।

क्या सकारात्मक वृद्धि से सदैव विकास होता है?

नहीं, सकारात्मक वृद्धि से हमेशा विकास नहीं होता। उदाहरण के लिए, यदि किसी शहर की जनसंख्या 1 लाख से बढ़कर 2 लाख हो जाए (सकारात्मक वृद्धि), लेकिन वहाँ आवास, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएँ न बढ़ें, तो उसे 'विकास' नहीं कहा जाएगा। विकास तभी होता है जब वृद्धि के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हो।



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