Class 12 Geography Chapter 5 Notes in Hindi | खनिज तथा ऊर्जा संसाधन | RBSE 2026


अध्याय 5: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन - विस्तृत नोट्स



1. परिचय

 * खनिज क्या है? खनिज एक निश्चित रासायनिक और भौतिक गुणधर्मों (विशिष्टताओं) के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है।

 * भारत की स्थिति: भारत अपनी भूगर्भिक संरचना में विविधता के कारण खनिजों से संपन्न है। अधिकांश खनिज प्रायद्वीपीय भारत की प्राचीन चट्टानों (आग्नेय और कायांतरित) में पाए जाते हैं, जबकि उत्तर भारत के विशाल जलोढ़ मैदान खनिजों से लगभग विहीन हैं।

 * महत्व: खनिज संसाधन किसी भी देश के औद्योगिक विकास के लिए आधार प्रदान करते हैं।


2. खनिजों का वर्गीकरण

खनिजों को उनके रासायनिक और भौतिक गुणों के आधार पर दो मुख्य वर्गों में बाँटा गया है:

A. धात्विक खनिज (Metallic Minerals): जिनसे धातु प्राप्त होती है।

 * लौह खनिज (Ferrous): जिनमें लोहे का अंश होता है।

   * उदाहरण: लौह अयस्क, मैंगनीज, क्रोमाइट आदि।

 * अलौह खनिज (Non-Ferrous): जिनमें लोहे का अंश नहीं होता।

   * उदाहरण: ताँबा, बॉक्साइट (एल्युमीनियम), सोना आदि।

B. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals):

 * ईंधन खनिज (कार्बनिक): जीवाश्म ईंधन जो पृथ्वी में दबे जीवों से बनते हैं।

   * उदाहरण: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।

 * अन्य अधात्विक खनिज (अकार्बनिक):

   * उदाहरण: अभ्रक (Mica), चूना पत्थर, ग्रेफाइट।


3. खनिजों की मुख्य विशेषताएँ

 * असमान वितरण: खनिज किसी क्षेत्र में समान रूप से नहीं फैले होते।

 * गुणवत्ता और मात्रा में विपरीत संबंध: उच्च गुणवत्ता वाले खनिज कम मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि निम्न गुणवत्ता वाले खनिज अधिक मात्रा में मिलते हैं।

 * समाप्य संसाधन: खनिज बनने में भूगर्भिक रूप से लंबा समय लगता है, इसलिए एक बार उपयोग होने के बाद इनका तुरंत पुनर्भरण नहीं हो सकता।


4. भारत में खनिजों का वितरण (प्रमुख पट्टियाँ)

भारत में खनिज मुख्य रूप से तीन पट्टियों में पाए जाते हैं:

1. उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश:

 * क्षेत्र: छोटानागपुर (झारखंड), ओडिशा के पठार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़।

 * खनिज: यह भारत की सबसे समृद्ध खनिज पट्टी है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, बॉक्साइट और अभ्रक भारी मात्रा में उपलब्ध हैं। इसी कारण प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग यहाँ स्थित हैं।

2. दक्षिण-पश्चिमी पठार प्रदेश:

 * क्षेत्र: कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु और केरल।

 * खनिज: यहाँ लौह अयस्क, मैंगनीज और चूना पत्थर की प्रचुरता है।

 * कमी: नेवेली लिगनाइट को छोड़कर यहाँ कोयले का अभाव है।

 * विशेषता: केरल में मोनाजाइट (थोरियम का स्रोत) और बॉक्साइट निक्षेप मिलते हैं। गोवा में लौह अयस्क है।

3. उत्तर-पश्चिमी प्रदेश:

 * क्षेत्र: राजस्थान (अरावली) और गुजरात।

 * खनिज: यहाँ की चट्टानें धारवाड़ क्रम की हैं। यहाँ ताँबा और जिंक (जस्ता) प्रमुख हैं।

 * भवन निर्माण पत्थर: राजस्थान में बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर, जिप्सम और मुल्तानी मिट्टी प्रचुर मात्रा में है।

 * ऊर्जा: गुजरात और राजस्थान दोनों पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के लिए जाने जाते हैं।

(अन्य: हिमालयी पट्टी में ताँबा, सीसा, जस्ता आदि मिलते हैं, और असम घाटी में खनिज तेल पाया जाता है)


5. प्रमुख धात्विक खनिजों का वितरण

A. लौह अयस्क (Iron Ore):

 * भारत में एशिया के विशालतम लौह अयस्क भंडार हैं। यहाँ मुख्य रूप से हेमेटाइट और मैग्नेटाइट किस्में पाई जाती हैं।

 * प्रमुख उत्पादक राज्य (95% भंडार): ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

   * ओडिशा: सुंदरगढ़, मयूरभंज (खदानें: गुरुमहिसानी, बादामपहाड़), केंदूझर (किरुबुरू)।

   * झारखंड: सिंहभूम जिला (खदानें: नोआमंडी, गुआ)। यह सबसे पुरानी खदानें हैं।

   * छत्तीसगढ़: बैलाडीला (दांतेवाड़ा) और डल्ली-राजहरा (दुर्ग)।

   * कर्नाटक: बेल्लारी (संदूर-होसपेटे), चिकमगलूरु (बाबा बूदन पहाड़ियाँ, कुद्रेमुख), और शिवमोगा।

   * महाराष्ट्र: चंद्रपुर, रत्नागिरी।

B. मैंगनीज (Manganese):

 * उपयोग: लौह अयस्क के प्रगलन (smelting) और लौह-मिश्रातु (ferro-alloys) बनाने में।

 * प्रमुख क्षेत्र: यह धारवाड़ क्रम की चट्टानों में मिलता है।

   * ओडिशा (अग्रणी उत्पादक): सुंदरगढ़, कालाहांडी, कोरापुट, बोनाई, केंदूझर।

   * मध्य प्रदेश: बालाघाट, छिंदवाड़ा, झाबुआ।

   * महाराष्ट्र: नागपुर, भंडारा (ये खदानें इस्पात संयंत्रों से दूर होने के कारण अलाभकारी हैं)।

   * कर्नाटक: बेल्लारी, बेलगावी, चित्रदुर्ग।

C. बॉक्साइट (Bauxite) - अलौह:

 * उपयोग: एल्युमीनियम बनाने में। यह लैटराइट चट्टानों में पाया जाता है।

 * ओडिशा (सबसे बड़ा उत्पादक): कालाहांडी, संभलपुर, कोरापुट।

 * झारखंड: लोहरदगा (पैटलैंडस)।

 * मध्य प्रदेश: अमरकंटक पठार, कटनी, बालाघाट।

 * छत्तीसगढ़: अमरकंटक पठार।

 * महाराष्ट्र: कोलाबा, रत्नागिरी।

D. ताँबा (Copper) - अलौह:

 * उपयोग: बिजली की मोटरें, ट्रांसफार्मर, और आभूषणों को मजबूती देने (सोने के साथ मिलाकर) में। यह आघातवर्ध्य और तन्य होता है।

 * प्रमुख क्षेत्र:

   * झारखंड: सिंहभूम जिला।

   * मध्य प्रदेश: बालाघाट।

   * राजस्थान: खेतड़ी (झुंझुनू), अलवर।


6. प्रमुख अधात्विक खनिज

अभ्रक (Mica):

 * उपयोग: विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में (क्योंकि यह विसंवाहक है और उच्च वोल्टेज सहन कर सकता है)।

 * प्रमुख क्षेत्र:

   * झारखंड: हजारीबाग पठार (उच्च गुणवत्ता वाला अभ्रक)।

   * आंध्र प्रदेश: नेल्लोर जिला (सर्वोत्तम प्रकार का अभ्रक)।

   * राजस्थान: जयपुर से भीलवाड़ा और उदयपुर तक की पट्टी (320 किमी लंबी)।


7. ऊर्जा संसाधन (परंपरागत स्रोत)

ये स्रोत समाप्य हैं और प्रदूषण फैलाते हैं।

A. कोयला (Coal):

 * महत्व: ताप विद्युत और लौह अयस्क प्रगलन के लिए मुख्य ईंधन।

 * भारत में कोयला दो भूगर्भिक कालों का है:

   * गोंडवाना कोयला (97% से अधिक): यह 20 करोड़ वर्ष पुराना है। यह मुख्य रूप से बिटुमिनस प्रकार का है।

     * क्षेत्र: दामोदर घाटी (झारखंड-प. बंगाल)।

     * प्रमुख खदानें: झरिया (सबसे बड़ा), रानीगंज, बोकारो, गिरिडीह, कोरबा (छत्तीसगढ़), तालचेर (ओडिशा), सिंगरेनी (तेलंगाना)।

   * टर्शियरी कोयला: यह 5.5 करोड़ वर्ष पुराना है।

     * क्षेत्र: असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय (चेरापूँजी), नागालैंड।

   * लिगनाइट (भूरा कोयला): तमिलनाडु के नेवेली, राजस्थान और गुजरात में मिलता है।

B. पेट्रोलियम (Petroleum/Mineral Oil):

 * महत्व: इसे 'तरल सोना' कहा जाता है। यह ऊर्जा का स्रोत है और पेट्रो-रसायन उद्योगों (उर्वरक, कृत्रिम रबर, दवाइयाँ) के लिए कच्चा माल है।

 * प्राप्ति: टर्शियरी युग की अवसादी शैलों में।

 * प्रमुख क्षेत्र:

   * असम: डिगबोई (सबसे पुराना), नहारकटिया, मोरान।

   * गुजरात: अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा।

   * अपतटीय (Offshore): मुंबई हाई (1976 में उत्पादन शुरू, मुंबई तट से 160 किमी दूर)। कृष्णा-गोदावरी और कावेरी बेसिन।

 * शोधन: तेल को रिफाइनरी में साफ किया जाता है। दो प्रकार की रिफाइनरी होती हैं:

   * क्षेत्र आधारित (जैसे: डिगबोई)।

   * बाज़ार आधारित (जैसे: बरौनी)।

C. प्राकृतिक गैस (Natural Gas):

 * यह पेट्रोलियम के साथ या स्वतंत्र रूप से पाई जाती है।

 * उपयोग: औद्योगिक ईंधन, बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, और वाहनों (CNG) व घरों (PNG) में ईंधन के रूप में।

 * भंडार: मुंबई हाई, खंभात की खाड़ी, और कृष्णा-गोदावरी बेसिन।


8. ऊर्जा संसाधन (अपरंपरागत / नवीकरणीय स्रोत)

ये स्रोत पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और सस्ती ऊर्जा प्रदान करते हैं।

A. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy):

 * खनिज: यूरेनियम और थोरियम।

 * यूरेनियम: झारखंड (सिंहभूम), राजस्थान (उदयपुर, अलवर), महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश।

 * थोरियम: केरल के तट की बालू में मोनाजाइट से प्राप्त होता है (विश्व का सबसे समृद्ध निक्षेप)।

 * प्रमुख केंद्र: तारापुर (महाराष्ट्र), रावतभाटा (राजस्थान - कोटा के पास), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (यूपी), कैगा (कर्नाटक), काकरापाड़ा (गुजरात)।

B. सौर ऊर्जा (Solar Energy):

 * फोटोवोल्टाइक सेलों द्वारा सूर्य की किरणों को बिजली में बदला जाता है।

 * यह कोयला/तेल आधारित संयंत्रों से 7% और नाभिकीय से 10% अधिक प्रभावी है।

 * संभावना: गुजरात और राजस्थान में सर्वाधिक संभावनाएँ हैं।

C. पवन ऊर्जा (Wind Energy):

 * प्रदूषण मुक्त और असमाप्य। पवन की गतिज ऊर्जा को टरबाइन द्वारा बिजली में बदला जाता है।

 * राज्य: राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अनुकूल स्थितियाँ हैं।

D. ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा (Tidal and Wave Energy):

 * समुद्र की लहरों और ज्वार से ऊर्जा।

 * संभावना: भारत के पश्चिमी तट पर वृहत ज्वारीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, लेकिन अभी इनका उपयोग कम हुआ है।

E. भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy):

 * पृथ्वी के भीतर से निकलने वाली गर्मी (मैग्मा या गीज़र/झरनों) का उपयोग।

 * परियोजना: हिमाचल प्रदेश के मनीकरण में भूतापीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है।

F. जैव-ऊर्जा (Bio-energy):

 * कृषि अवशेष, नगरपालिका और औद्योगिक कचरे से ऊर्जा उत्पादन।

 * लाभ: कचरा प्रबंधन, प्रदूषण में कमी और आत्मनिर्भरता।

 * उदाहरण: नई दिल्ली के ओखला में कचरे से ऊर्जा बनाने की परियोजना।


9. खनिज संसाधनों का संरक्षण

खनिज सीमित और अनवीकरणीय हैं, इसलिए इनका संरक्षण अनिवार्य है।

 * उपाय:

   * ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों (सौर, पवन, आदि) का उपयोग बढ़ाना।

   * छाजन धातुओं (Scrap metals) का पुनर्चक्रण (Recycling)।

   * ताँबा, सीसा, जस्ता जैसे कम उपलब्ध खनिजों के लिए विकल्प ढूँढना।

   * सामरिक और दुर्लभ खनिजों के निर्यात को कम करना।

   * सतत पोषणीय विकास की अवधारणा को अपनाना ताकि भावी पीढ़ियों के लिए संसाधन बचे रहें।




महत्वपूर्ण प्रश्न



1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)


प्रश्न 1: निम्नलिखित में से किस स्थान पर भारत का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित किया गया था?

(क) कलपक्कम

(ख) नरोरा

(ग) राणाप्रताप सागर

(घ) तारापुर

उत्तर: (घ) तारापुर


प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा का अनवीकरणीय (Non-renewable) स्रोत है?

(क) जल

(ख) सौर

(ग) ताप (Thermal)

(घ) पवन

उत्तर: (ग) ताप

(नोट: ताप विद्युत कोयला/पेट्रोलियम से बनती है जो अनवीकरणीय हैं)


प्रश्न 3: भारत में मैंगनीज का अग्रणी उत्पादक राज्य कौन सा है?

(क) मध्य प्रदेश

(ख) ओडिशा

(ग) महाराष्ट्र

(घ) कर्नाटक

उत्तर: (ख) ओडिशा


प्रश्न 4: निम्नलिखित में से किस राज्य में प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित हैं?

(क) बिहार

(ख) असम

(ग) तमिलनाडु

(घ) राजस्थान

उत्तर: (ख) असम


2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)

 

* केरल के तटीय क्षेत्र की पुलिन (beach) बालू में ________ खनिज पाया जाता है, जिससे थोरियम प्राप्त होता है।

   उत्तर: मोनाजाइट

 * बॉक्साइट का उपयोग ________ के विनिर्माण में किया जाता है।

   उत्तर: एल्युमीनियम

 * भारत में सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला कोयला ________ प्रकार का होता है, हालांकि इसकी मात्रा कम है।

   उत्तर: एंथ्रासाइट (या बिटुमिनस जो 80% है)

 * ________ को 'तरल सोना' (Liquid Gold) भी कहा जाता है।

   उत्तर: पेट्रोलियम


3. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न (Very Short Answer Questions)


प्रश्न 1: 'नाभिकीय ऊर्जा' (Nuclear Energy) क्या है? इसके उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले दो खनिजों के नाम लिखिए।

उत्तर: नाभिकीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो अणुओं के विखंडन से प्राप्त होती है। इसके लिए यूरेनियम और थोरियम का उपयोग होता है।


प्रश्न 2: भारत की सबसे बड़ी मैकेनाइज्ड (मशीनीकृत) लौह अयस्क खदान कौन सी है?

उत्तर: बैलाडीला (छत्तीसगढ़)।


प्रश्न 3: 'खनिज' की परिभाषा दें।

उत्तर: एक खनिज निश्चित रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है।


प्रश्न 4: मुंबई हाई क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर: यह पेट्रोलियम (खनिज तेल) के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।


4. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)


प्रश्न 1: भारत में पेट्रोलियम संसाधनों के वितरण पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:  पेट्रोलियम (खनिज तेल) ऊर्जा का एक अनिवार्य स्रोत है। भारत में इसके प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

 * असम: यह भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य है। डिगबोई, नहारकटिया और मोरान यहाँ के महत्वपूर्ण तेल क्षेत्र हैं।

 * गुजरात: यहाँ अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा और नवागाम प्रमुख तेल क्षेत्र हैं।

 * मुंबई हाई: यह मुंबई तट से 160 कि.मी. दूर अरब सागर में स्थित अपतटीय (offshore) क्षेत्र है। यहाँ 1976 में उत्पादन शुरू हुआ और यह देश का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है।

 * पूर्वी तट: कृष्णा-गोदावरी और कावेरी नदियों के बेसिन में भी नए तेल व गैस भंडार मिले हैं।


प्रश्न 2: ऊर्जा के अपारंपरिक (Non-conventional) स्रोतों का वर्णन कीजिए और भारत में इनके महत्व को समझाइए।

उत्तर:  ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत नवीकरणीय (renewable) और पर्यावरण-अनुकूल होते हैं। भारत के लिए इनका महत्व बढ़ता जा रहा है:

 * सौर ऊर्जा: फोटोवोल्टाइक सेलों द्वारा सूर्य की किरणों को बिजली में बदला जाता है। भारत के पश्चिमी भाग (गुजरात, राजस्थान) में इसकी अपार संभावना है।

 * पवन ऊर्जा: बहती हवा से टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है। तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में इसके लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं।

 * नाभिकीय ऊर्जा: यूरेनियम और थोरियम से प्राप्त होती है। तारापुर, रावतभाटा, कलपक्कम प्रमुख केंद्र हैं।

 * जैव-ऊर्जा: कृषि अवशेषों और कचरे से ऊर्जा बनाई जाती है। यह प्रदूषण कम करने और ग्रामीण आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक है (जैसे ओखला, दिल्ली की परियोजना)।

 * महत्व: ये स्रोत प्रदूषण मुक्त हैं, कभी समाप्त नहीं होते और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हैं।


प्रश्न 3: भारत में लौह अयस्क (Iron Ore) के वितरण और उत्पादन का विवरण दें।

उत्तर:  भारत में एशिया के विशालतम लौह अयस्क भंडार हैं। यहाँ हेमेटाइट और मैग्नेटाइट किस्में पाई जाती हैं।

 * ओडिशा: सुंदरगढ़, मयूरभंज और केंदूझर जिलों में (जैसे बादामपहाड़, किरुबुरू खदानें)।

 * झारखंड: यह सबसे पुरानी खदानों वाला राज्य है। सिंहभूम जिले में नोआमंडी और गुआ प्रमुख खदानें हैं।

 * छत्तीसगढ़: यहाँ बैलाडीला और डल्ली-राजहरा की खदानें प्रसिद्ध हैं।

 * कर्नाटक: बेल्लारी (संदूर-होसपेटे), कुद्रेमुख और बाबा बूदन की पहाड़ियाँ प्रमुख क्षेत्र हैं।

 * अन्य: गोवा, महाराष्ट्र (रत्नागिरी) और तेलंगाना भी उत्पादक हैं।



1 comment: