अध्याय 6: भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास
1. नियोजन (Planning) का अर्थ और प्रकार
* अर्थ: नियोजन का तात्पर्य सोच-विचार की प्रक्रिया, कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना और उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए गतिविधियों को लागू करना है।
* भारत में नियोजन: स्वतंत्रता के बाद केंद्रीकृत नियोजन अपनाया गया। योजना आयोग (अब नीति आयोग) योजनाओं को तैयार करने के लिए जिम्मेदार था।
* नियोजन के दो मुख्य उपगमन (Approaches):
* खंडीय नियोजन (Sectoral Planning): अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों (जैसे- कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, परिवहन, संचार) के विकास के लिए योजना बनाना और लागू करना।
* प्रादेशिक नियोजन (Regional Planning): विकास में क्षेत्रीय असंतुलन (Regional Imbalance) को कम करने के लिए किसी विशेष क्षेत्र के विकास के लिए योजना बनाना। क्योंकि सभी क्षेत्रों का विकास समान रूप से नहीं हुआ है।
2. लक्ष्य क्षेत्र नियोजन (Target Area Planning)
* आवश्यकता: आर्थिक विकास में क्षेत्रीय और सामाजिक विषमताओं को कम करने के लिए।
* उद्देश्य: आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना।
* प्रमुख कार्यक्रम:
* लक्ष्य क्षेत्र कार्यक्रम: कमान क्षेत्र विकास कार्यक्रम, सूखाग्रस्त क्षेत्र विकास कार्यक्रम, पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम।
* लक्ष्य समूह कार्यक्रम: लघु कृषक विकास संस्था (SFDA), सीमांत किसान विकास संस्था (MFDA)।
3. पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम (Hill Area Development Programme)
* शुरुआत: पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में।
* क्षेत्र: उत्तर प्रदेश के पर्वतीय जिले (अब उत्तराखंड), असम की मिकिर व उत्तरी कछार पहाड़ियाँ, दार्जिलिंग (प. बंगाल), और नीलगिरी (तमिलनाडु)। (कुल 15 जिले)।
* सिफारिशें: 1981 में राष्ट्रीय समिति ने उन क्षेत्रों को शामिल करने का सुझाव दिया जो 600 मीटर से ऊँचे हैं और जहाँ जनजातीय उप-योजना लागू नहीं है।
* उद्देश्य/सुझाव:
* सभी लोगों को लाभ पहुँचाना (केवल प्रभावशाली को नहीं)।
* स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं का विकास।
* जीविका निर्वाह अर्थव्यवस्था को निवेश-उन्मुखी बनाना।
* पिछड़े क्षेत्रों के शोषण को रोकना।
* पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखना।
* कार्य: बागवानी, रोपण कृषि, पशुपालन, वानिकी और लघु उद्योगों का विकास।
4. सूखा संभावी क्षेत्र विकास कार्यक्रम (Drought Prone Area Programme)
* शुरुआत: चौथी पंचवर्षीय योजना।
* उद्देश्य: सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और सूखे के प्रभाव को कम करना।
* रणनीति:
* शुरुआत में निर्माण कार्यों (मज़दूरी प्रधान) पर जोर दिया गया।
* बाद में सिंचाई, भूमि विकास, वनीकरण, चरागाह विकास और बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली, बाजार) पर ध्यान केंद्रित किया गया।
* समीक्षा: राष्ट्रीय समिति ने पाया कि यह कार्यक्रम मुख्य रूप से कृषि तक सीमित रह गया।
* सुझाव: जल, मिट्टी, पौधों, मानव और पशु जनसंख्या के बीच पारिस्थितिकीय संतुलन (Ecological Balance) पुनः स्थापित करना। जल-संभर विकास (Watershed Development) अपनाना।
* क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात, प. मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा (महाराष्ट्र), रायलसीमा और तेलंगाना (आंध्र प्रदेश), कर्नाटक पठार।
5. केस स्टडी: भरमौर क्षेत्र (समन्वित जनजातीय विकास कार्यक्रम)
* क्षेत्र: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की दो तहसीलें (भरमौर और होली)। यह 'गद्दी' जनजाति का निवास स्थान है।
* विशेषताएँ: कठोर जलवायु, कम संसाधन, भंगुर पर्यावरण। गद्दी लोग ऋतु-प्रवास (Transhumance) करते हैं।
* योजना: 1974 में पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के तहत इसे 'समन्वित जनजातीय विकास परियोजना' (ITDP) का दर्जा मिला।
* उद्देश्य: गद्दियों के जीवन स्तर में सुधार और हिमाचल के अन्य भागों के साथ विकास के अंतर को कम करना।
* प्राथमिकता: परिवहन, संचार, कृषि और सामाजिक सेवाओं (स्कूल, स्वास्थ्य) का विकास।
* उपलब्धियाँ (सकारात्मक प्रभाव):
* साक्षरता दर में तेजी से वृद्धि (विशेषकर महिला साक्षरता: 1971 में 1.88% से 2011 में 65%)।
* लिंग अनुपात में सुधार और बाल विवाह में कमी।
* दालों और नकदी फसलों की खेती बढ़ी है।
* कुरीतियाँ (जैसे बाल विवाह) कम हुईं।
* कमी: तुंदाह और कुगती जैसे दूरदराज के क्षेत्र अभी भी विकास से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।
6. सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development)
* विकास की बदलती अवधारणा:
* पहले विकास का अर्थ केवल 'आर्थिक वृद्धि' (GNP, प्रति व्यक्ति आय) था।
* 1970 के दशक में 'समानता' और 'पुनर्वितरण' को जोड़ा गया।
* अब इसमें जन स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता शामिल है।
* सतत पोषणीय विकास की उत्पत्ति: 1960 के दशक में पर्यावरण की चिंता बढ़ी।
* ब्रंटलैंड रिपोर्ट (1987): 'अवर कॉमन फ्यूचर' रिपोर्ट में परिभाषा दी गई: "एक ऐसा विकास जिसमें भविष्य में आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकता पूर्ति को प्रभावित किए बिना वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।"
7. केस स्टडी: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र (Indira Gandhi Canal Command Area)
* परिचय: यह भारत के सबसे बड़े नहर तंत्रों में से एक है। 1948 में कँवर सेन द्वारा संकल्पित। 1958 में शुरू।
* स्रोत: पंजाब में हरिके बैराज (सतलुज और व्यास नदी के संगम पर)।
* क्षेत्र: राजस्थान के थार मरुस्थल (बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर आदि)।
* सिंचाई तंत्र: कुल कमान क्षेत्र का 70% प्रवाह नहरों से और 30% लिफ्ट नहरों से सिंचित होता है।
* प्रभाव (सकारात्मक):
* मरुस्थल हरा-भरा हो गया (वनीकरण और चरागाह)।
* फसलों का प्रारूप बदला: चना, बाजरा की जगह गेहूँ, कपास, मूँगफली और चावल उगाया जाने लगा।
* कृषि और पशुधन उत्पादकता में भारी वृद्धि।
* प्रभाव (नकारात्मक/समस्याएँ):
* सघन सिंचाई से जल भराव (Waterlogging) और मृदा लवणता (Soil Salinity) की समस्या उत्पन्न हो गई है।
सतत पोषणीय विकास के लिए उपाय (Suggestions):
* जल प्रबंधन नीति: जल का वितरण सख्ती से हो। 'वारबंदी' (ओसरा) पद्धति लागू हो।
* फसल चयन: जल सघन फसलों (जैसे चावल) को नहीं उगाना चाहिए। खट्टे फलों (बागवानी) को बढ़ावा देना चाहिए।
* नालों को पक्का करना: पानी के रिसाव को रोकने के लिए।
* पारितंत्र विकास: वनीकरण, रक्षण मेखला (Shelterbelt) और चरागाह विकास करना, विशेषकर भंगुर क्षेत्रों में।
* भूमि सुधार: जलाक्रांत और लवणीय भूमि को सुधारा जाए।
* वित्तीय सहायता: गरीब किसानों को कृषि के लिए मदद दी जाए।
* आर्थिक विविधीकरण: केवल कृषि पर निर्भर न रहकर अन्य सेक्टरों (कृषि सेवा केंद्र, मंडी) का विकास हो।
महत्वपूर्ण प्रश्न
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: 'प्रदेशीय नियोजन' (Regional Planning) का संबंध किससे है?
(क) आर्थिक व्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों का विकास
(ख) क्षेत्र विशेष के विकास का उपागम
(ग) परिवहन जल तंत्र में क्षेत्रीय अंतर
(घ) ग्रामीण क्षेत्रों का विकास
उत्तर: (ख) क्षेत्र विशेष के विकास का उपागम
प्रश्न 2: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र में सतत पोषणीय विकास के लिए इनमें से कौन-सा सबसे महत्वपूर्ण कारक है?
(क) कृषि विकास
(ख) पारितंत्र-विकास (Eco-development)
(ग) परिवहन विकास
(घ) भूमि उपनिवेशन
उत्तर: (ख) पारितंत्र-विकास
प्रश्न 3: पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम किस पंचवर्षीय योजना में प्रारंभ किया गया था?
(क) तीसरी
(ख) चौथी
(ग) पाँचवीं
(घ) छठी
उत्तर: (ग) पाँचवीं
प्रश्न 4: 'भरमौर जनजातीय क्षेत्र' किस राज्य में स्थित है?
(क) उत्तराखंड
(ख) जम्मू-कश्मीर
(ग) हिमाचल प्रदेश
(घ) सिक्किम
उत्तर: (ग) हिमाचल प्रदेश
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)
* योजना आयोग का स्थान 1 जनवरी 2015 को ________ ने ले लिया।
उत्तर: नीति आयोग
* 'अवर कॉमन फ्यूचर' रिपोर्ट, जिसे ब्रंटलैंड रिपोर्ट भी कहते हैं, वर्ष ________ में प्रस्तुत की गई थी।
उत्तर: 1987
* भरमौर क्षेत्र में ________ जनजातीय समुदाय का आवास है।
उत्तर: गद्दी
* इंदिरा गांधी नहर, जिसे पहले ________ नहर के नाम से जाना जाता था, भारत के सबसे बड़े नहर तंत्रों में से एक है।
उत्तर: राजस्थान
3. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न (Very Short Answer Questions)
प्रश्न 1: 'खंडीय नियोजन' (Sectoral Planning) का क्या अर्थ है?
उत्तर: अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों (जैसे कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, परिवहन आदि) के विकास के लिए कार्यक्रम बनाना और लागू करना खंडीय नियोजन कहलाता है।
प्रश्न 2: सूखा संभावी क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत किस पंचवर्षीय योजना में हुई थी?
उत्तर: चौथी पंचवर्षीय योजना में।
प्रश्न 3: इंदिरा गांधी नहर किस बैराज से निकलती है?
उत्तर: हरिके बैराज (पंजाब) से।
प्रश्न 4: सतत पोषणीय विकास की परिभाषा दें।
उत्तर: एक ऐसा विकास जिसमें भविष्य में आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकता पूर्ति को प्रभावित किए बिना वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
4. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र में सतत पोषणीय विकास को बढ़ावा देने के लिए उपाय सुझाएँ।
उत्तर: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र में पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने और सतत विकास के लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं:
* जल प्रबंधन: जल प्रबंधन नीति को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
* फसल प्रतिरूप: जल सघन फसलों (जैसे चावल) को नहीं बोना चाहिए। इसके स्थान पर खट्टे फलों की बागवानी खेती को बढ़ावा देना चाहिए।
* नालों को पक्का करना: पानी के रिसाव को रोकने के लिए नालों को पक्का करना चाहिए।
* पारितंत्र विकास: वनीकरण, रक्षण मेखला (Shelterbelt) और चरागाह विकास करना चाहिए, विशेषकर भंगुर क्षेत्रों में।
* भूमि सुधार: जलाक्रांत और लवण से प्रभावित भूमि का पुनरुद्धार किया जाना चाहिए।
* वित्तीय सहायता: निर्धन किसानों को कृषि के लिए पर्याप्त वित्तीय और संस्थागत सहायता मिलनी चाहिए।
प्रश्न 2: भरमौर क्षेत्र में समन्वित जनजातीय विकास कार्यक्रम के सामाजिक लाभ क्या हैं?
उत्तर: भरमौर क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) में समन्वित जनजातीय विकास परियोजना (ITDP) लागू होने से गद्दी जनजाति को महत्वपूर्ण सामाजिक लाभ मिले हैं:
* साक्षरता में वृद्धि: साक्षरता दर में तेजी से वृद्धि हुई है। 1971 में स्त्री साक्षरता दर 1.88% थी जो 2011 में बढ़कर 65% हो गई।
* लिंग अनुपात में सुधार: स्त्री और पुरुष साक्षरता दर में अंतर कम हुआ है और लिंग अनुपात सुधरा है।
* बाल विवाह में कमी: बाल विवाह जैसी कुरीतियों में कमी आई है।
* जीवन स्तर: सड़कों, संचार, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
प्रश्न 3: सूखा संभावी क्षेत्र विकास कार्यक्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें और बताएँ कि यह शुष्क भूमि कृषि विकास में कैसे सहायक है?
उत्तर: इस कार्यक्रम की शुरुआत चौथी पंचवर्षीय योजना में हुई थी। इसका उद्देश्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और उत्पादन के साधनों को विकसित करना था।
* रणनीति: इसमें भूमि विकास, जल संरक्षण, वनीकरण और चरागाह विकास पर जोर दिया गया।
* शुष्क भूमि कृषि में सहायता: यह कार्यक्रम जल और मिट्टी के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है। सूक्ष्म स्तर पर 'समन्वित जल-संभर विकास' (Watershed Development) को अपनाकर यह शुष्क क्षेत्रों में नमी बनाए रखने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद करता है।
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