अध्याय 8: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार - विस्तृत नोट्स
1. परिचय
* अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सभी देशों के लिए परस्पर लाभदायक है क्योंकि कोई भी देश आत्मनिर्भर नहीं है।
* भारत की स्थिति: विश्व व्यापार में भारत की भागीदारी मात्रा के हिसाब से केवल 1% है, लेकिन विश्व अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
* वृद्धि: 1950-51 में भारत का विदेशी व्यापार 1,214 करोड़ रुपये था, जो 2021-22 में बढ़कर 77,19,796 करोड़ रुपये हो गया।
* कारण: विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि, उदार सरकारी नीतियाँ और बाजारों की विविधता।
2. भारत के विदेश व्यापार के बदलते प्रारूप
* व्यापार घाटा: भारत का व्यापार संतुलन ऋणात्मक है, यानी निर्यात की तुलना में आयात का मूल्य अधिक है।
* 2004-05 में घाटा: -1,25,725 करोड़ रु.
* 2021-22 में घाटा: -14,25,753 करोड़ रु.
A. निर्यात संघटन (Export Composition):
* बदलाव: कृषि और विनिर्माण वस्तुओं की हिस्सेदारी घटी है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ी है।
* विनिर्मित वस्तुएँ: 2021-22 में कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी सर्वाधिक (67.8%) रही। इसमें मणि-रत्न और आभूषण प्रमुख हैं।
* कृषि उत्पाद: पारंपरिक वस्तुओं (जैसे काजू) के निर्यात में गिरावट आई है, लेकिन ताजे फल, समुद्री उत्पाद और चीनी के निर्यात में वृद्धि हुई है।
* पेट्रोलियम उत्पाद: इनका निर्यात 2015-16 में 11.9% से बढ़कर 2021-22 में 16.4% हो गया।
B. आयात संघटन (Import Composition):
* 1950-60 का दशक: खाद्यान्न, पूंजीगत माल और मशीनरी प्रमुख आयात थे।
* 1970 के बाद: हरित क्रांति की सफलता से खाद्यान्न आयात रुका, लेकिन 1973 के ऊर्जा संकट के बाद पेट्रोलियम आयात बढ़ गया।
* वर्तमान स्थिति (2021-22):
* पेट्रोलियम: सबसे बड़ा आयात (31.6%)। इसका उपयोग ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल के रूप में होता है।
* अन्य आयात: मोती, बहुमूल्य रत्न, सोना-चाँदी, खाद्य तेल और रसायन।
* पूंजीगत वस्तुएँ: इनके आयात में गिरावट आई है, जो देश में बढ़ते औद्योगीकरण को दर्शाता है।
3. व्यापार की दिशा (Direction of Trade)
* उद्देश्य: भारत का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को दोगुना करना है। इसके लिए आयात उदारीकरण और करों में कटौती जैसे उपाय अपनाए गए हैं।
* प्रमुख भागीदार: भारत के व्यापारिक संबंध विश्व के अधिकांश देशों के साथ हैं।
* आयात के स्रोत (2021-22):
* एशिया एवं आसियान: सबसे बड़ा भागीदार (29,18,577 करोड़ रु. का आयात)।
* यूरोप: 6,40,577 करोड़ रु.
* उत्तरी अमेरिका: 3,78,041 करोड़ रु.
4. समुद्री पत्तन: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार
भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और इसकी तटरेखा 7,517 कि.मी. लंबी है।
* महत्व: भारत का 95% (भार) और 70% (मूल्य) विदेशी व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
* पत्तन: भारत में 12 प्रमुख और 200 छोटे/मझोले पत्तन हैं।
* प्रमुख पत्तन केंद्र सरकार के अधीन हैं और कुल यातायात का बड़ा हिस्सा संभालते हैं।
* छोटे पत्तन राज्य सरकारों के अधीन हैं।
* क्षमता: 1951 में 20 मिलियन टन से बढ़कर 2016 में 837 मिलियन टन हो गई।
प्रमुख भारतीय पत्तन और उनकी विशेषताएँ:
A. पश्चिमी तट के पत्तन:
* दीनदयाल पत्तन (कांडला): कच्छ की खाड़ी में। कराची पत्तन की कमी को पूरा करने और मुंबई पत्तन का दबाव कम करने के लिए विकसित किया गया। यह पेट्रोलियम और उर्वरकों का आयात करता है।
* मुंबई पत्तन: देश का सबसे बड़ा प्राकृतिक पत्तन। यहाँ देश का अधिकांश विदेशी व्यापार होता है। इसमें 54 गोदियाँ हैं।
* जवाहरलाल नेहरू पत्तन (न्हावा शेवा): मुंबई पत्तन का दबाव कम करने के लिए बनाया गया। यह भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पत्तन है।
* मार्मागाओ पत्तन (गोवा): जुआरी नदमुख पर स्थित प्राकृतिक बंदरगाह। 1961 के बाद जापान को लौह-अयस्क निर्यात के लिए इसका महत्व बढ़ा। कोंकण रेलवे ने इसका विस्तार किया।
* न्यू मंगलौर पत्तन (कर्नाटक): लौह-अयस्क, उर्वरक, पेट्रोलियम और कॉफी/चाय का निर्यात करता है।
* कोच्चि पत्तन (केरल): बेंबानद कयाल (अरब सागर की रानी) के मुहाने पर स्थित प्राकृतिक पत्तन। यह स्वेज-कोलंबो मार्ग के पास है।
B. पूर्वी तट के पत्तन:
* कोलकाता पत्तन: हुगली नदी पर स्थित नदी-पत्तन (Riverine Port)। अंग्रेजों द्वारा विकसित। विशाखापट्नम और पारादीप के विकास के कारण इसका महत्व कुछ कम हुआ है। यह भूटान और नेपाल जैसे स्थलरुद्ध देशों को भी सुविधा देता है।
* हल्दिया पत्तन: कोलकाता से 105 कि.मी. दूर। कोलकाता पत्तन का दबाव कम करने के लिए बनाया गया।
* पारादीप पत्तन (ओडिशा): महानदी डेल्टा पर। इसका पोताश्रय गहरा है, जो भारी पोतों के लिए अनुकूल है। लौह-अयस्क निर्यात के लिए प्रमुख।
* विशाखापट्नम पत्तन (आंध्र प्रदेश): यह एक भू-आबद्ध (Land-locked) पत्तन है जिसे नहर द्वारा समुद्र से जोड़ा गया है।
* चेन्नई पत्तन: पूर्वी तट का सबसे पुराना कृत्रिम पत्तन (1859 में निर्मित)। उथले जल के कारण विशाल पोतों के लिए अनुकूल नहीं है।
* एन्नोर पत्तन: चेन्नई के उत्तर में। चेन्नई पत्तन का दबाव कम करने के लिए विकसित।
* तूतीकोरिन पत्तन: चेन्नई पत्तन का दबाव कम करने के लिए विकसित। यह कोयला, नमक, खाद्य तेल और पेट्रोलियम का निपटान करता है।
5. हवाई अड्डे (Airports)
* भूमिका: उच्च मूल्य वाली या जल्दी खराब होने वाली (नाशवान) वस्तुओं को लंबी दूरी तक कम समय में भेजने के लिए।
* सीमा: भारी और स्थूल वस्तुओं के लिए यह महंगा और अनुपयुक्त है।
* संख्या: देश में 25 प्रमुख हवाई अड्डे हैं।
* प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे: अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, गोवा, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, तिरुवनंतपुरम आदि।
* उड़ान (UDAN) योजना: इसके तहत 2017 के बाद से 73 नए/अल्पसेवित हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट और जल हवाई अड्डे चालू किए गए हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: निम्नलिखित में से कौन-सा एक स्थलबद्ध (Land-locked) पोताश्रय है?
(क) विशाखापट्नम
(ख) मुंबई
(ग) एन्नोर
(घ) हल्दिया
उत्तर: (क) विशाखापट्नम
प्रश्न 2: वर्ष 2021-22 में भारत के आयात का सबसे बड़ा भागीदार क्षेत्र कौन-सा था?
(क) यूरोप
(ख) उत्तरी अमेरिका
(ग) एशिया एवं आसियान
(घ) अफ्रीका
उत्तर: (ग) एशिया एवं आसियान
प्रश्न 3: भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार (मात्रा में) किसके द्वारा वहन होता है?
(क) स्थल और समुद्र द्वारा
(ख) स्थल और वायु द्वारा
(ग) समुद्र और वायु द्वारा
(घ) समुद्र द्वारा
उत्तर: (घ) समुद्र द्वारा
प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन-सा पत्तन हुगली नदी पर स्थित है?
(क) कोलकाता
(ख) पारादीप
(ग) हल्दिया
(घ) मुंबई
उत्तर: (क) कोलकाता
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)
* भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पत्तन ________ है।
उत्तर: जवाहरलाल नेहरू पत्तन (न्हावा शेवा)
* ________ को 'अरब सागर की रानी' के नाम से जाना जाता है, जिसके मुहाने पर कोच्चि पत्तन स्थित है।
उत्तर: बेंबानद कयाल
* वर्ष 2021-22 में भारत के कुल निर्यात मूल्य में विनिर्मित वस्तुओं की हिस्सेदारी ________ प्रतिशत थी।
उत्तर: 67.8
* ________ पत्तन का विकास चेन्नई पत्तन के दबाव को कम करने के लिए किया गया था।
उत्तर: एन्नोर (या तूतीकोरिन)
3. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न (Very Short Answer Questions)
प्रश्न 1: 'व्यापार संतुलन' (Balance of Trade) क्या है?
उत्तर: एक निश्चित समय में किसी देश के आयात और निर्यात के मूल्यों के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं।
प्रश्न 2: भारत के पश्चिमी तट पर स्थित किन्हीं दो प्रमुख पत्तनों के नाम लिखिए।
उत्तर: मुंबई और कांडला (दीनदयाल पत्तन)।
प्रश्न 3: किस पत्तन को देश के विभाजन के बाद कराची पत्तन की कमी को पूरा करने के लिए विकसित किया गया था?
उत्तर: कांडला (दीनदयाल पत्तन)।
प्रश्न 4: पृष्ठ प्रदेश (Hinterland) किसे कहते हैं?
उत्तर: पृष्ठ प्रदेश वह क्षेत्र है जो किसी पत्तन को माल (निर्यात के लिए) प्रदान करता है और आयातित माल प्राप्त करता है।
4. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: समय के साथ भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं:
* व्यापार की मात्रा: भारत के विदेशी व्यापार का मूल्य और मात्रा दोनों तेजी से बढ़े हैं।
* निर्यात संघटन: पहले कृषि और पारंपरिक वस्तुओं का निर्यात अधिक था। अब विनिर्मित वस्तुओं (जैसे इंजीनियरिंग सामान, रत्न-आभूषण) और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात बढ़ा है।
* आयात संघटन: पहले खाद्यान्न का आयात प्रमुख था। अब पेट्रोलियम (कच्चा तेल), पूँजीगत वस्तुएँ, और मोती-रत्न प्रमुख आयात हैं।
* व्यापार की दिशा: भारत ने अपने व्यापारिक भागीदारों में विविधता लाई है। अब एशिया, यूरोप और अमेरिका के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों से भी व्यापार बढ़ा है।
प्रश्न 2: भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख पत्तन निम्नलिखित हैं:
* कोलकाता पत्तन: यह हुगली नदी पर स्थित एक नदी पत्तन है।
* हल्दिया पत्तन: यह कोलकाता के पास स्थित है और उसका सहायक पत्तन है।
* पारादीप पत्तन (ओडिशा): यह लौह अयस्क के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है और इसका गहरा पोताश्रय है।
* विशाखापट्नम पत्तन (आंध्र प्रदेश): यह एक भू-आबद्ध पत्तन है, जिसे नहर द्वारा समुद्र से जोड़ा गया है।
* चेन्नई पत्तन (तमिलनाडु): यह सबसे पुराने कृत्रिम पत्तनों में से एक है।
* एन्नोर और तूतीकोरिन पत्तन: ये तमिलनाडु में स्थित हैं और चेन्नई पत्तन का भार कम करते हैं।
प्रश्न 3: भारतीय पत्तन किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार हैं? स्पष्ट करें।
उत्तर: भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और इसकी लंबी तटरेखा है।
* व्यापार का माध्यम: भारत का लगभग 95% विदेशी व्यापार (मात्रा में) और 70% (मूल्य में) समुद्री मार्गों द्वारा होता है।
* सुविधा: पत्तन जहाजों के रुकने, माल चढ़ाने-उतारने और भंडारण की सुविधा प्रदान करते हैं।
* संपर्क: ये पत्तन भारत को विश्व के अन्य देशों (यूरोप, एशिया, अफ्रीका, अमेरिका) से जोड़ते हैं, इसलिए इन्हें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रवेश द्वार कहा जाता है।
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