Chapters Notes
Class 12 Study Material
History (इतिहास)
Book 1: भारतीय इतिहास के कुछ विषय - I
Chapter 1: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ Chapter 2: राजा, किसान और नगर Chapter 3: बंधुत्व, जाति तथा वर्ग Chapter 4: विचारक, विश्वास और इमारतें
Book 2: भारतीय इतिहास के कुछ विषय - II
Chapter 5: यात्रियों के नज़रिए Chapter 6: भक्ति-सूफ़ी परंपराएँ Chapter 7: एक साम्राज्य की राजधानी Chapter 8: किसान, ज़मींदार और राज्य
Book 3: भारतीय इतिहास के कुछ विषय - III
Chapter 9: उपनिवेशवाद और देहात Chapter 10: उपनिवेशवाद और देहात Chapter 11: विद्रोही और राज Chapter 12: संविधान का निर्माण
Geography (भूगोल)
Book: भारत: लोग और अर्थव्यवस्था
Chapter 1: जनसंख्या वितरण... Chapter 2: मानव बस्तियाँ Chapter 3: भू-संसाधन तथा कृषि Chapter 4: जल-संसाधन Chapter 5: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन Chapter 6: भारत के संदर्भ में नियोजन Chapter 7: परिवहन तथा संचार Chapter 8: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Chapter 9: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में...
Book: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत
Chapter 1: मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र Chapter 2: विश्व जनसंख्या – वितरण, घनत्व Chapter 3: मानव विकास Chapter 4: प्राथमिक क्रियाएँ Chapter 5: द्वितीयक क्रियाएँ

Thursday

Class 12 Geography Chapter 5 Notes in Hindi | द्वितीयक क्रियाएँ (Secondary Activities)

 अध्याय 5: द्वितीयक क्रियाएँ



1. परिचय

 * आर्थिक क्रियाओं को चार वर्गों में बाँटा जाता है: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक।

 * संसाधन और उपयोग: सभी आर्थिक क्रियाओं का उद्देश्य संसाधनों की प्राप्ति और उनका उपयोग करना है, जो मानव के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।

 * द्वितीयक क्रियाओं का महत्त्व: ये प्राकृतिक संसाधनों का रूप बदलकर उन्हें अधिक मूल्यवान बना देती हैं।

   * उदाहरण: कपास (कम मूल्य) से वस्त्र (अधिक मूल्य), लौह अयस्क से इस्पात (जिससे मशीनें और औजार बनते हैं)।

 * क्षेत्र: द्वितीयक क्रियाओं का संबंध विनिर्माण (Manufacturing), प्रसंस्करण (Processing) और निर्माण (Construction) उद्योगों से है।


2. विनिर्माण (Manufacturing)

 * अर्थ: विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है 'हाथ से बनाना', लेकिन अब इसमें मशीनों द्वारा बनाया गया सामान भी शामिल है। यह कच्चे माल को उच्च मूल्य के तैयार माल में बदलने की प्रक्रिया है।

 * विशेषताएँ:

   * शक्ति (ऊर्जा) का उपयोग।

   * एक ही प्रकार की वस्तुओं का विशाल उत्पादन।

   * कारखानों में विशिष्ट श्रमिक जो मानक वस्तुओं का उत्पादन करते हैं।

 * तृतीय विश्व के देश: यहाँ विनिर्माण में अभी भी हस्तशिल्प और कम जटिल उत्पादन तंत्र का महत्त्व है, जबकि विकसित देशों में यह अत्यधिक यंत्रीकृत है।


3. आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषताएँ

आधुनिक उद्योगों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

 * कौशल का विशिष्टीकरण (उत्पादन की विधियाँ):

   * 'शिल्प' विधि में आदेशानुसार कम सामान बनता है जिसकी लागत अधिक होती है।

   * 'बड़े पैमाने पर उत्पादन' में प्रत्येक कारीगर निरंतर एक ही कार्य करता है, जिससे विशेषज्ञता आती है।

 * यंत्रीकरण (Mechanization):

   * कार्यों को करने के लिए मशीनों का प्रयोग।

   * स्वचालन (Automation): यह विकसित अवस्था है जहाँ मशीनें मानवीय सोच के बिना कार्य करती हैं (कंप्यूटर नियंत्रण प्रणाली)।

 * प्रौद्योगिकीय नवाचार:

   * गुणवत्ता नियंत्रण, अपशिष्ट निस्तारण, अदक्षता को समाप्त करना और प्रदूषण कम करने के लिए निरंतर शोध और विकास किया जाता है।

 * संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण:

   * एक जटिल प्रौद्योगिकी यंत्र।

   * अत्यधिक विशिष्टीकरण और श्रम विभाजन।

   * अधिक पूँजी।

   * बड़ा संगठन और प्रशासनिक अधिकारी वर्ग।

 * अनियमित भौगोलिक वितरण:

   * आधुनिक उद्योग विश्व के कुल स्थलीय भाग के 10% से भी कम पर स्थित हैं।

   * ये आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के केंद्र बन गए हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका की मक्का पेटी के बड़े क्षेत्र की तुलना में एक छोटे से औद्योगिक क्षेत्र में अधिक रोजगार और उत्पादन होता है।


4. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक

उद्योगों की स्थापना वहाँ की जाती है जहाँ लागत कम हो और लाभ अधिक हो।

 * बाज़ार तक अभिगम्यता (Access to Market):

   * सबसे प्रमुख कारक। इसका अर्थ है उस क्षेत्र में तैयार वस्तुओं की माँग और लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power)।

   * विकसित देश (यूरोप, अमेरिका, जापान) बड़े वैश्विक बाज़ार हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया के घने बसे प्रदेश भी बड़े बाज़ार हैं।

 * कच्चे माल की प्राप्ति तक अभिगम्यता:

   * कच्चा माल सस्ता और परिवहन योग्य होना चाहिए।

   * भार ह्रास वाले उद्योग: (जिनका वजन निर्माण के बाद कम हो जाता है, जैसे- चीनी, सीमेंट, इस्पात) कच्चे माल के स्रोतों के पास लगाए जाते हैं।

   * शीघ्र नष्ट होने वाले पदार्थ: (जैसे- डेरी, कृषि उत्पाद) भी स्रोतों के पास संसाधित किए जाते हैं।

 * श्रम आपूर्ति तक अभिगम्यता:

   * यंत्रीकरण के बावजूद कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

 * शक्ति के साधनों तक अभिगम्यता:

   * अधिक ऊर्जा चाहने वाले उद्योग (जैसे एल्युमिनियम) बिजली स्रोतों के पास लगाए जाते हैं। पहले कोयला मुख्य था, अब जल विद्युत और खनिज तेल भी महत्वपूर्ण हैं।

 * परिवहन एवं संचार की सुविधाएँ:

   * कच्चे माल को लाने और तैयार माल को बाज़ार तक भेजने के लिए तीव्र परिवहन अनिवार्य है। (पश्चिमी यूरोप और पूर्वी अमेरिका में परिवहन तंत्र विकसित होने के कारण उद्योगों का संकेंद्रण है)।

 * सरकारी नीति:

   * संतुलित आर्थिक विकास के लिए सरकारें विशिष्ट क्षेत्रों में उद्योग लगाने की नीति बनाती हैं।

 * समूहन अर्थव्यवस्था (Agglomeration Economies):

   * एक प्रधान उद्योग के पास अन्य उद्योगों के खुलने से उन्हें लाभ मिलता है (जैसे पुर्जे बनाने वाले उद्योग)। उद्योगों के बीच की श्रृंखला से बचत होती है।


5. स्वच्छंद उद्योग (Footloose Industries)

 * ये उद्योग किसी विशिष्ट कच्चे माल (जिसके भार में कमी हो या नहीं) पर निर्भर नहीं करते।

 * ये संघटक पुर्जों (components) पर निर्भर करते हैं जो कहीं से भी लाए जा सकते हैं।

 * इनमें कम उत्पादन और कम श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

 * ये प्रदूषण नहीं फैलाते।

 * इनकी स्थापना में सड़क परिवहन की अभिगम्यता सबसे महत्वपूर्ण कारक है।


6. विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण

A. आकार के आधार पर:

 * कुटीर/घरेलू उद्योग:

   * सबसे छोटी इकाई।

   * शिल्पकार और उसका परिवार घर पर ही स्थानीय कच्चे माल और साधारण औजारों से वस्तुएँ बनाते हैं।

   * उत्पादन का उपभोग स्वयं करते हैं या स्थानीय बाज़ार में बेचते हैं।

   * उदाहरण: खाद्य पदार्थ, चटाइयाँ, बर्तन, औजार, फर्नीचर, जूते, लघु मूर्तियाँ।

 * छोटे पैमाने के उद्योग:

   * यह कुटीर उद्योग से भिन्न है। इसमें उत्पादन घर से बाहर कारखाने में होता है।

   * अर्द्ध-कुशल श्रमिक और छोटी मशीनों का प्रयोग होता है।

   * भारत, चीन, ब्राजील जैसे देशों में रोजगार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

 * बड़े पैमाने के उद्योग:

   * विशाल बाज़ार, विभिन्न प्रकार का कच्चा माल, शक्ति के साधन, कुशल श्रमिक, विकसित तकनीक और अधिक पूँजी की आवश्यकता।

   * शुरुआत ब्रिटेन और अमेरिका में हुई, अब विश्वव्यापी है।

B. कच्चे माल के आधार पर:

 * कृषि आधारित: कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण। (शक्कर, अचार, फलों के रस, पेय पदार्थ, मसाले, तेल, वस्त्र, रबड़)।

   * भोजन प्रसंस्करण (Food Processing): डिब्बा बंद खाद्य, क्रीम, मिठाइयाँ। खाद्य को सुरक्षित रखने की विधियाँ (सुखाना, अचार बनाना)।

 * खनिज आधारित:

   * धात्विक: लौह (लोहा-इस्पात) और अलौह (एल्युमिनियम, ताँबा, जवाहरात)।

   * अधात्विक: सीमेंट, चीनी मिट्टी के बर्तन।

 * रसायन आधारित: पेट्रो-रसायन (खनिज तेल से), प्लास्टिक, कृत्रिम रेशे, नमक, उर्वरक।

 * वनों पर आधारित: इमारती लकड़ी (फर्नीचर), कागज (लुगदी), लाख उद्योग।

 * पशु आधारित: चमड़ा और ऊनी वस्त्र, हाथीदाँत।

C. उत्पाद/उत्पादन के आधार पर:

 * आधारभूत उद्योग (Basic Industries): जिनके उत्पाद अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल होते हैं। (उदाहरण: लौह-इस्पात उद्योग, जिससे मशीनें बनती हैं जो फिर कपड़ा बनाती हैं)।

 * उपभोक्ता वस्तु उद्योग (Consumer Goods Industries): जो सीधे उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए सामान बनाते हैं। (उदाहरण: ब्रेड, बिस्कुट, चाय, साबुन, टीवी, कागज)।

D. स्वामित्व के आधार पर:

 * सार्वजनिक क्षेत्र: सरकार के अधीन। (समाजवादी देशों में अधिक)।

 * निजी क्षेत्र: व्यक्तिगत निवेशकों या निजी संगठनों के पास स्वामित्व। (पूँजीवादी देशों में अधिक)।

 * संयुक्त क्षेत्र: निजी और सार्वजनिक दोनों का संयुक्त प्रयास।


7. उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग (High Technology Industry)

 * यह निर्माण क्रियाओं की नवीनतम पीढ़ी है।

 * इसमें गहन शोध और विकास (R&D) द्वारा उन्नत वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण होता है।

 * श्रमिक: इसमें 'सफेद कॉलर' (व्यावसायिक/दक्ष) श्रमिकों की संख्या 'नीला कॉलर' (वास्तविक उत्पादन) श्रमिकों से अधिक होती है।

 * उदाहरण: यंत्रमानव (Robotics), कंप्यूटर आधारित डिजाइन (CAD), इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण, नए रासायनिक और औषधीय उत्पाद।

 * भू-दृश्य: विशाल कारखानों की जगह साफ-सुथरे, बिखरे कार्यालय और प्रयोगशालाएँ।

 * प्रौद्योगिक ध्रुव (Technopolis): वे क्षेत्र जहाँ उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग संकेंद्रित होते हैं। (उदाहरण: सिलिकन घाटी - सैन फ्रांसिस्को, सिलिकन वन - सिएटल)।



महत्वपूर्ण प्रश्न 


1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)


प्रश्न 1: निम्न में से कौन-सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है?

(क) कुटीर उद्योग

(ख) छोटे पैमाने के उद्योग

(ग) आधारभूत उद्योग

(घ) स्वच्छंद उद्योग

उत्तर: (ग) आधारभूत उद्योग


प्रश्न 2: निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?

(क) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण स्थापित हुए।

(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं।

(ग) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।

(घ) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है।

उत्तर: (ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं।

(नोट: ये उद्योग कच्चे माल पर आधारित होते हैं, स्वच्छंद नहीं)


प्रश्न 3: निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है?

(क) पूँजीवाद

(ख) मिश्रित

(ग) समाजवाद

(घ) कोई भी नहीं

उत्तर: (क) पूँजीवाद


प्रश्न 4: 'रुहर' (Ruhr) कोयला क्षेत्र किस देश में स्थित है, जो एक प्रमुख औद्योगिक प्रदेश भी रहा है?

(क) फ्रांस

(ख) जर्मनी

(ग) रूस

(घ) ब्रिटेन

उत्तर: (ख) जर्मनी


2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)


1. विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है ________, फिर भी इसमें यंत्रों द्वारा बनाया गया सामान भी सम्मिलित किया जाता है।

उत्तर: हाथ से बनाना

2. वे उद्योग जो किसी विशिष्ट कच्चे माल (जिसके भार में कमी हो रही है अथवा नहीं) पर निर्भर नहीं रहते, उन्हें ________ उद्योग कहते हैं।

उत्तर: स्वच्छंद (Footloose)

3. ________ उद्योग में दैनिक जीवन के उपयोग में आने वाली वस्तुओं जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़ा, चटाइयाँ आदि का उत्पादन परिवार के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

उत्तर: कुटीर (या घरेलू)

4. सैन फ्रांसिस्को के समीप 'सिलीकन घाटी' ________ उद्योग का एक अच्छा उदाहरण है।

उत्तर: प्रौद्योगिक ध्रुव (Technopolis)


3. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न (Very Short Answer Questions)


प्रश्न 1: 'विनिर्माण' से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: विनिर्माण से आशय किसी भी वस्तु के उत्पादन से है, जिसमें कच्चे माल को शारीरिक श्रम या मशीनों द्वारा उच्च मूल्य के तैयार माल में बदला जाता है।


प्रश्न 2: आधारभूत उद्योग (Basic Industries) किसे कहते हैं?

उत्तर: वे उद्योग जिनके उत्पाद को अन्य वस्तुएँ बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाया जाता है (जैसे लौह-इस्पात उद्योग), उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं।


प्रश्न 3: 'स्वच्छंद उद्योग' की एक मुख्य विशेषता बताइए।

उत्तर: ये उद्योग संघटक पुर्जों (components) पर निर्भर रहते हैं जो कहीं से भी प्राप्त किए जा सकते हैं और ये प्रदूषण नहीं फैलाते।


प्रश्न 4: कृषि आधारित किन्हीं दो उद्योगों के नाम लिखिए।

उत्तर: चीनी उद्योग और सूती वस्त्र उद्योग।


4. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)


प्रश्न 1: उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले किन्हीं चार प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: उद्योगों की स्थापना वहाँ की जाती है जहाँ लागत कम आए और लाभ अधिक हो। इसके मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:


*बाज़ार तक अभिगम्यता: उद्योगों की स्थापना में सबसे प्रमुख कारक बाज़ार का उपलब्ध होना है। बाज़ार का मतलब है उस क्षेत्र में तैयार वस्तुओं की माँग और लोगों की खरीदने की क्षमता (क्रय शक्ति)।

* कच्चे माल की प्राप्ति: जो उद्योग भारी या वजन घटने वाले कच्चे माल (जैसे गन्ना, लौह अयस्क) पर आधारित होते हैं, वे कच्चे माल के स्रोत के पास ही लगाए जाते हैं ताकि परिवहन लागत कम हो।

* शक्ति के साधन: जिन उद्योगों में अधिक ऊर्जा की ज़रूरत होती है (जैसे एल्युमिनियम उद्योग), वे बिजली या ऊर्जा स्रोतों के पास लगाए जाते हैं।

* परिवहन एवं संचार: कच्चे माल को कारखाने तक लाने और तैयार माल को बाज़ार तक पहुँचाने के लिए सस्ते और तेज़ परिवहन की आवश्यकता होती है।


प्रश्न 2: आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर:  आजकल बड़े कारखानों में होने वाले विनिर्माण की अपनी खास पहचान है:


* कौशल का विशिष्टीकरण: इसमें 'शिल्प' तरीके की बजाय 'आदेशानुसार' उत्पादन नहीं होता, बल्कि एक ही तरह का सामान भारी मात्रा में बनाया जाता है। प्रत्येक कारीगर एक ही काम बार-बार करता है।

* यंत्रीकरण:  कार्यों को करने के लिए स्वचालित मशीनों और कंप्यूटर नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया जाता है।

* प्रौद्योगिकीय नवाचार:  गुणवत्ता को सुधारने, प्रदूषण कम करने और कचरे के निस्तारण के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल होता है।

* संगठनात्मक ढाँचा:  इसमें जटिल प्रौद्योगिकी, अत्यधिक विशिष्टीकरण, अधिक पूँजी और बड़े प्रशासनिक अधिकारी वर्ग की ज़रूरत होती है।


प्रश्न 3: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।

उत्तर:  स्वामित्व (मालिक कौन है) के आधार पर उद्योगों को तीन वर्गों में बाँटा गया है:

* सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector): ये उद्योग सरकार के अधीन होते हैं। समाजवादी देशों में ज़्यादातर उद्योग इसी श्रेणी में आते हैं। भारत में भी बहुत से उद्योग (जैसे भिलाई स्टील प्लांट) सार्वजनिक क्षेत्र में हैं।

* निजी क्षेत्र (Private Sector):  इनका स्वामित्व व्यक्तिगत निवेशकों या निजी कंपनियों के पास होता है। पूँजीवादी देशों में अधिकतर उद्योग निजी क्षेत्र में होते हैं। (जैसे टाटा स्टील)।

* संयुक्त क्षेत्र (Joint Sector):  इन उद्योगों का संचालन किसी निजी कंपनी और सरकारी एजेंसी के संयुक्त प्रयासों द्वारा किया जाता है।


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