अध्याय 2: राजा, किसान और नगर
1. पृष्ठभूमि: हड़प्पा के बाद का काल
हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद, लगभग 1,500 वर्षों के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में कई महत्वपूर्ण विकास हुए। यह काल भारतीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत था।
➤ ऋग्वेद का लेखन : इसी काल में सिंधु और उसकी उपनदियों के किनारे रहने वाले लोगों द्वारा ऋग्वेद का संकलन किया गया।
➤ कृषि बस्तियों का उदय : उत्तर भारत, दक्कन के पठार और कर्नाटक जैसे क्षेत्रों में नई कृषक बस्तियाँ अस्तित्व में आईं।
➤ महापाषाण (Megaliths) संस्कृति :
✦ ईसा पूर्व पहली सहस्राब्दि के दौरान मध्य और दक्षिण भारत में शवों के अंतिम संस्कार के नए तरीके सामने आए।
✦ यहाँ बड़े-बड़े पत्थरों के ढाँचे मिले हैं जिन्हें 'महापाषाण' कहा जाता है।
◆ विशेषता : कई स्थानों पर शवों के साथ लोहे के उपकरण और हथियार भी दफनाए गए थे, जो लोहे के बढ़ते प्रयोग का संकेत देते हैं।
2. प्रिंसेप और पियदस्सी (भारतीय अभिलेखशास्त्र में क्रांति)
इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखों की भूमिका सबसे अहम होती है, लेकिन उन्हें पढ़ना एक चुनौती थी।
➤ जेम्स प्रिंसेप की खोज (1830 का दशक):
✦ जेम्स प्रिंसेप ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी थे।
✦ उन्होंने 1830 के दशक में भारतीय इतिहास की दो सबसे कठिन लिपियों—ब्राह्मी और खरोष्ठी—का अर्थ निकाला।
◆ महत्व : इन लिपियों का उपयोग सबसे पुराने अभिलेखों और सिक्कों में किया गया था, जिससे इतिहास के बंद दरवाजे खुल गए।
➤ 'पियदस्सी' की पहचान :
✦ प्रिंसेप ने पाया कि अधिकांश अभिलेखों में राजा को 'पियदस्सी' कहा गया है, जिसका अर्थ है—"मनोहर मुखाकृति वाला" (देखने में सुंदर)।
✦ कुछ अभिलेखों में राजा का असली नाम 'असोक' भी मिला।
◆ पुष्टि : बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक प्राचीन भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध शासकों में से एक था।
3. प्रारंभिक राज्य (The Earliest States)
(क) 16 महाजनपद (छठी शताब्दी ई.पू. - एक प्रमुख मोड़)
छठी शताब्दी ई.पू. को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है।
➤ परिवर्तन के मुख्य कारण :
आरंभिक राज्यों और नगरों का उदय।
लोहे का बढ़ता प्रयोग।
सिक्कों का विकास।
नए विचार : इसी काल में बौद्ध और जैन धर्म सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं का विकास हुआ।
➤ महाजनपदों की प्रणाली :
✦ उल्लेख : बौद्ध और जैन ग्रंथों में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
✦ प्रमुख महाजनपद : वज्जि, मगध, कोशल, कुरु, पांचाल, गांधार और अवन्ति सबसे महत्वपूर्ण थे।
✦ शासन के दो प्रकार :
राजतंत्र : अधिकांश महाजनपदों पर एक राजा का शासन होता था।
गण और संघ (ओलीगार्की) : वज्जि जैसे राज्यों में 'समूह शासन' था। यहाँ सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में नहीं, बल्कि कई लोगों के समूह के हाथ में होती थी और समूह का हर व्यक्ति 'राजा' कहलाता था।
◆ नोट: भगवान महावीर और भगवान बुद्ध इन्हीं गणों से संबंधित थे।
➤ विशेषताएँ :
✦ प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी जिसे प्राय : किले से घेरा जाता था।
✦ सेना और वित्त: स्थायी सेना और नौकरशाही रखने के लिए भारी आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता थी।
✦ धर्मशास्त्र : छठी शताब्दी ई.पू. से ब्राह्मणों ने संस्कृत में 'धर्मशास्त्र' नामक ग्रंथ लिखना शुरू किया।
◆ इसमें शासकों (जो क्षत्रिय होने चाहिए) के लिए नियम थे, जैसे किसानों और व्यापारियों से कर (Tax) वसूलना।
(ख) मगध का उत्थान (सबसे शक्तिशाली महाजनपद)
छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. के बीच मगध (आधुनिक बिहार) सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया।
➤ आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार कारण:
* खेती : मगध क्षेत्र में उपजाऊ मिट्टी थी जिससे फसल अच्छी होती थी।
* लोहे की खदानें : (आधुनिक झारखंड) हथियार और उपकरण बनाने के लिए लोहा आसानी से उपलब्ध था।
* हाथी : यहाँ के जंगलों में हाथी उपलब्ध थे जो सेना का एक महत्वपूर्ण अंग थे।
* आवागमन : गंगा और उसकी उपनदियों से सस्ता और सुलभ परिवहन उपलब्ध था।
➤ जैन और बौद्ध लेखकों के अनुसार कारण:
✦ मगध की सफलता का श्रेय बिंबिसार, अजातसत्तु और महापद्मनंद जैसे महत्त्वाकांक्षी राजाओं और उनकी नीतियों को दिया गया।
➤ राजधानियाँ:
* राजगाह : (आधुनिक राजगीर) यह मगध की प्रारंभिक राजधानी थी। यह पहाड़ियों के बीच बसा एक किलेबंद शहर था। इसका अर्थ है 'राजाओं का घर'।
* पाटलिपुत्र : (आधुनिक पटना) बाद में चौथी शताब्दी ई.पू. में राजधानी यहाँ स्थानांतरित की गई क्योंकि यह गंगा के रास्ते संचार और व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से बेहतर थी।
4. एक आरंभिक साम्राज्य: मौर्य साम्राज्य (The Mauryan Empire)
मगध के विकास के साथ मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ।
➤ संस्थापक : चंद्रगुप्त मौर्य (लगभग 321 ई.पू.)।
➤ विस्तार : उनका शासन पश्चिमोत्तर में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला था।
➤ कलिंग विजय : उनके पौत्र अशोक ने कलिंग (आधुनिक उड़ीसा) पर विजय प्राप्त की।
(ख) मौर्य इतिहास जानने के स्रोत (Sources)
इतिहासकार मौर्य साम्राज्य के पुनर्निर्माण के लिए विविध स्रोतों का उपयोग करते हैं:
* पुरातात्विक प्रमाण : विशेषकर मूर्तिकला।
* मेगस्थनीज़ : यूनानी राजदूत जो चंद्रगुप्त के दरबार में आया था। उसकी पुस्तक (इंडिका) के विवरण मूल्यवान हैं।
* अर्थशास्त्र : इसके कुछ भाग कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित माने जाते हैं, जो चंद्रगुप्त के मंत्री थे।
* साहित्य : जैन, बौद्ध, पौराणिक ग्रंथ और संस्कृत वाङ्मय।
* अशोक के अभिलेख : पत्थरों और स्तंभों पर मिले लेख सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं।
(ग) अशोक का 'धम्म' (Dhamma)
अशोक पहला सम्राट था जिसने प्रजा तक संदेश पहुँचाने के लिए प्राकृतिक पत्थरों और पॉलिश किए हुए स्तंभों का सहारा लिया।
➤ धम्म के सिद्धांत : ये बहुत साधारण और सार्वभौमिक थे।
✦ बड़ों के प्रति आदर।
✦ संन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता।
✦ सेवकों और दासों के साथ उदार व्यवहार।
✦ दूसरे धर्मों और परंपराओं का सम्मान।
◆ प्रचार : इसके लिए 'धम्म महामात्त' नाम के विशेष अधिकारी नियुक्त किए गए।
(घ) साम्राज्य का प्रशासन (Detailed Administration)
मौर्य साम्राज्य बहुत विशाल और विविध था, इसलिए प्रशासन हर जगह एक जैसा नहीं हो सकता था।
➤ 5 प्रमुख राजनीतिक केंद्र :
* पाटलिपुत्र (राजधानी)।
* तक्षशिला (प्रांतीय केंद्र)।
* उज्जयिनी (प्रांतीय केंद्र)।
* तोसलि (प्रांतीय केंद्र)।
* सुवर्णगिरि (प्रांतीय केंद्र)।
◆ चयन का कारण: तक्षशिला और उज्जयिनी लंबी दूरी के व्यापारिक मार्गों पर थे, जबकि सुवर्णगिरि (अर्थात सोने का पहाड़) कर्नाटक की सोने की खदानों के लिए महत्वपूर्ण था।
➤ सैन्य प्रशासन (मेगस्थनीज़ का विवरण):
मेगस्थनीज़ ने सैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए 1 समिति और 6 उपसमितियों का उल्लेख किया है:
* नौसेना का संचालन।
* यातायात और खान-पान (बैलगाड़ियों की व्यवस्था, भोजन, चारा ढोना)।
* पैदल सैनिक।
* अश्वारोही (घोड़े)।
* रथारोही (रथ)।
* हाथी।
(ङ) मौर्य साम्राज्य का महत्व: वास्तविकता बनाम धारणा
◆ राष्ट्रवादी दृष्टिकोण: 19वीं-20वीं सदी के राष्ट्रवादी नेताओं ने अशोक को प्रेरणा का स्रोत माना क्योंकि वह एक शक्तिशाली, परिश्रमी और विनीत शासक थे।
◆ ऐतिहासिक सीमाएँ:
✦ यह साम्राज्य मात्र 150 साल तक चला।
✦ यह पूरे उपमहाद्वीप में नहीं फैला था।
✦ साम्राज्य के भीतर भी नियंत्रण एकसमान नहीं था।
5. राजधर्म के नवीन सिद्धांत (New Notions of Kingship)
(क) दक्षिण के राजा और सरदार
दक्कन और दक्षिण भारत (तमिलकम - तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल) में चोल, चेर और पाण्ड्य जैसी सरदारियों का उदय हुआ।
➤ सरदार (Chiefs):
✦ यह एक शक्तिशाली व्यक्ति होता था जिसका पद वंशानुगत हो भी सकता था और नहीं भी।
✦ यह 'कर' (Tax) नहीं, बल्कि लोगों से 'भेंट' (Gifts) लेता था।
✦ इनके पास प्रायः कोई स्थायी सेना नहीं होती थी।
◆ स्रोत: प्राचीन तमिल संगम ग्रंथों में सरदारों और उनके विवरण मिलते हैं।
(ख) दैविक राजा (Divine Kings)
राजाओं ने अपनी स्थिति को ऊँचा उठाने के लिए देवी-देवताओं से जुड़ना शुरू किया।
➤ कुषाण शासक (लगभग 1st सदी ई.पू. - 1st सदी ई.):
✦ इन्होंने राजधर्म को सबसे बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया।
✦ विशाल मूर्तियाँ: मथुरा के पास 'माट' और अफगानिस्तान के देवस्थानों पर कुषाण शासकों की विशालकाय मूर्तियाँ मिली हैं, जो उन्हें देव-तुल्य दर्शाती हैं।
✦ उपाधि: इन्होंने 'देवपुत्र' की उपाधि धारण की (संभवतः चीनी शासकों के 'स्वर्गपुत्र' से प्रेरित)।
(ग) गुप्त साम्राज्य और सामंतवाद
चौथी शताब्दी ई. में गुप्त साम्राज्य का उदय हुआ।
➤ सामंत प्रणाली:
✦ गुप्त शासक सामंतों पर निर्भर थे।
✦ सामंत स्थानीय संसाधनों और भूमि पर नियंत्रण रखते थे और राजा को सैनिक सहायता देते थे।
✦ जो सामंत शक्तिशाली होते थे वे राजा बन जाते थे, और दुर्बल राजा सामंतों के अधीन हो जाते थे।
➤ प्रशस्तियाँ (Prashastis):
✦ कवियों द्वारा अपने राजा की प्रशंसा में लिखी गईं रचनाएँ।
✦ प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख): इसे समुद्रगुप्त के राजकवि हरिषेण ने संस्कृत में लिखा था।
◆ इसमें समुद्रगुप्त को 'परमात्मा पुरुष' कहा गया है और उनकी तुलना कुबेर (धन देव), वरुण (समुद्र देव), इंद्र (वर्षा देव) और यम (मृत्यु देव) से की गई है।
6. बदलता हुआ देहात (Changing Countryside)
(क) जनता में राजा की छवि
अभिलेखों में आम जनता के विचार नहीं मिलते, इसलिए इतिहासकारों ने जातक और पंचतंत्र की कथाओं का सहारा लिया।
➤ गंदतिन्दु जातक :
✦ इस कहानी में बताया गया है कि एक कुटिल राजा की प्रजा (बूढ़े, किसान, जानवर) किस प्रकार दुखी रहती थी।
✦ राजा के करों (Tax) की मार और डकैतों के हमले से बचने के लिए लोग गाँव छोड़कर जंगल में भाग जाते थे।
◆ निष्कर्ष: राजा और ग्रामीण प्रजा के बीच संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहते थे।
(ख) उपज बढ़ाने के तरीके
बढ़ते करों को चुकाने के लिए किसानों ने उपज बढ़ाने के नए तरीके अपनाए:
* हल का प्रचलन : छठी शताब्दी ई.पू. से गंगा और कावेरी की घाटियों में लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग शुरू हुआ, जिससे उर्वर भूमि की जुताई आसान हुई।
✦ अपवाद: पंजाब और राजस्थान जैसे अर्धशुष्क क्षेत्रों में लोहे के हल का प्रयोग 20वीं सदी में जाकर शुरू हुआ।
✦ पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने कुदाल का उपयोग जारी रखा।
* धान की रोपाई : इससे उपज में भारी वृद्धि हुई, हालाँकि इसमें कमरतोड़ मेहनत लगती थी।
* सिंचाई: कुओं, तालाबों और नहरों का निर्माण किया गया।
➤ सुदर्शन झील (गुजरात) की कहानी:
✦ निर्माण: मौर्य काल में एक स्थानीय राज्यपाल द्वारा।
✦ मरम्मत 1 : एक तूफान में तटबंध टूट गए, जिसे शक शासक रुद्रदमन ने अपने निजी खर्चे से ठीक करवाया और प्रजा से कर नहीं लिया।
✦ मरम्मत 2 : पाँचवीं सदी में गुप्त वंश के शासक ने फिर इसकी मरम्मत करवाई।
(ग) ग्रामीण समाज में विभिन्नताएँ
खेती की नई तकनीकों ने लाभ तो दिया, लेकिन समाज में भेद भी बढ़ाया।
➤ तीन प्रमुख वर्ग (बौद्ध कथाओं में):
* भूमिहीन खेतिहर श्रमिक।
* छोटे किसान।
* बड़े ज़मींदार।
➤ गहपति: पालि भाषा में यह शब्द छोटे किसानों और ज़मींदारों (घर का मुखिया) के लिए प्रयोग होता था।
➤ तमिल संगम साहित्य में वर्ग:
✦ वेल्लालर (बड़े ज़मींदार)।
✦ उल्वर/हलवाहा (किसान)।
✦ अणिमई (दास)।
(घ) भूमिदान और नए संभ्रांत (Land Grants)
ईसवी की आरंभिक शताब्दियों से भूमिदान के प्रमाण (ताम्रपत्रों पर) मिलते हैं।
➤ किसे दिया गया? धार्मिक संस्थाओं और ब्राह्मणों को। इसे 'अग्रहार' कहा जाता था।
✦ ब्राह्मणों को कर नहीं देना होता था, बल्कि वे स्थानीय लोगों से कर वसूल सकते थे।
➤ प्रभावती गुप्त का उदाहरण (महत्वपूर्ण अपवाद):
✦ वह आरंभिक भारत के शासक चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री थी और वाकाटक परिवार में ब्याही गई थी।
✦ महत्व : धर्मशास्त्रों के अनुसार महिलाओं को भूमि पर अधिकार नहीं था, लेकिन अभिलेख बताते हैं कि प्रभावती भूमि की स्वामी थी और उसने दान भी किया。
✦ दंगुन गाँव अभिलेख : इसमें प्रभावती ने गाँव वालों को आदेश दिया कि वे नए स्वामी (आचार्य) की आज्ञा मानें और उन्हें सभी प्रकार के कर/भेंट दें।
➤ भूमिदान के कारण (इतिहासकारों में विवाद):
* कृषि को नए क्षेत्रों में प्रोत्साहित करने के लिए।
* दुर्बल होते राजनीतिक प्रभुत्व को छिपाने और सामंतों/समर्थकों को जुटाने के लिए।
7. नगर एवं व्यापार (Towns and Trade)
(क) नए नगर
अधिकांश नगर महाजनपदों की राजधानियाँ थे और संचार मार्गों पर स्थित थे।
➤ पाटलिपुत्र का इतिहास : पहले यह पाटलिग्राम गाँव था। 5वीं सदी ई.पू. में मगध शासकों ने इसे राजधानी बनाया। 7वीं सदी ई. में जब चीनी यात्री श्वैन त्सांग आया, तो यह नगर खंडहर में बदल चुका था।
➤ अन्य नगर : उज्जयिनी (भूतल मार्ग), पुहार (समुद्र तट), मथुरा (व्यावसायिक केंद्र)।
(ख) नगरीय जनसंख्या और शिल्प
➤ उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र (NBPW) : खुदाई में मिले उत्कृष्ट श्रेणी के चमकदार बर्तन, जिनका उपयोग संभवतः अमीर लोग करते थे।
➤ श्रेणी (Guilds) : यह उत्पादकों और व्यापारियों का संघ था। श्रेणियाँ पहले कच्चा माल खरीदती थीं, सामान तैयार करती थीं और फिर बेचती थीं।
➤ दानात्मक अभिलेख : इनमें नगरों में रहने वाले धोबी, बुनकर, लिपिक, बढ़ई, स्वर्णकार आदि का उल्लेख मिलता है।
(ग) व्यापार (उपमहाद्वीप और बाहर)
छठी शताब्दी ई.पू. से जल और थल मार्गों का जाल बिछ गया।
➤ मार्ग: मध्य एशिया तक भू-मार्ग और अरब सागर/बंगाल की खाड़ी से समुद्री मार्ग।
➤ वस्तुएँ: नमक, अनाज, कपड़ा, धातु, जड़ी-बूटी।
✦ काली मिर्च: रोमन साम्राज्य में इसकी भारी माँग थी। भारी मात्रा में रोमन सिक्के दक्षिण भारत में मिले हैं।
✦ पेरिप्लस ऑफ एरीथ्रियन सी: एक यूनानी नाविक का विवरण जो भारत के बंदरगाहों और आयात-निर्यात (सिक्के, पुखराज, मोती, हाथी दाँत) की जानकारी देता है।
(घ) सिक्के और राजा (Coins)
सिक्के व्यापार और विनिमय का मुख्य माध्यम थे।
* आहत सिक्के (Punch-marked) : (छठी शताब्दी ई.पू.)। ये सबसे पुराने सिक्के हैं (चाँदी और ताँबे के)। इन पर प्रतीकों को 'आहत' करके (पीटकर) बनाया जाता था।
* हिंद-यूनानी (Indo-Greeks) : (द्वितीय शताब्दी ई.पू.)। इन्होंने सबसे पहले शासकों की प्रतिमा और नाम वाले सिक्के जारी किए।
* कुषाण सिक्के : (प्रथम शताब्दी ई.)। इन्होंने बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए। इनका वजन और आकार रोमन सिक्कों जैसा था, जो भारी व्यापार का संकेत है।
* यौधेय सिक्के : पंजाब और हरियाणा के गणराज्यों (यौधेय) ने ताँबे के सिक्के जारी किए।
* गुप्त सिक्के : इनके आरंभिक सोने के सिक्के सबसे भव्य और अति उत्तम थे।
◆ गिरावट : छठी शताब्दी ई. से सोने के सिक्के कम मिलने लगे। यह या तो आर्थिक संकट (रोमन साम्राज्य का पतन) का संकेत है या फिर नए व्यापारिक तंत्रों के उदय का।
8. अभिलेखों का अर्थ कैसे निकाला जाता है? (Deciphering Inscriptions)
(क) ब्राह्मी लिपि
आधुनिक भारतीय भाषाओं की लगभग सभी लिपियों की जननी ब्राह्मी है।
➤ प्रक्रिया : 18वीं सदी से विद्वानों ने बंगाली और देवनागरी पांडुलिपियों की तुलना पुराने अक्षरों से की।
➤ सफलता : 1838 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने अशोककालीन ब्राह्मी को पूरी तरह पढ़ लिया।
(ख) खरोष्ठी लिपि
यह पश्चिमोत्तर भारत के अभिलेखों में प्रयुक्त होती थी।
➤ प्रक्रिया : हिंद-यूनानी राजाओं के सिक्कों ने इसमें मदद की। इन सिक्कों पर यूनानी और खरोष्ठी दोनों में नाम लिखे थे (जैसे अपोलोडोटस)। विद्वानों ने दोनों लिपियों के अक्षरों (जैसे 'अ') का मेल किया।
(ग) अभिलेख साक्ष्य की सीमाएँ (Limitations) - महत्वपूर्ण प्रश्न
अभिलेखों से प्राप्त जानकारी की भी अपनी सीमाएँ होती हैं:
* तकनीकी सीमाएँ : अक्षर हल्के खुदे हो सकते हैं या अभिलेख टूटे हो सकते हैं जिससे शब्द लुप्त हो जाते हैं।
* अर्थ निकालना : शब्दों का वास्तविक अर्थ (Context) समझना हमेशा सरल नहीं होता।
* सीमित विवरण : अभिलेख केवल "विशेष अवसरों" का वर्णन करते हैं, दैनिक जीवन और सुख-दुख का नहीं।
* अभिजात वर्गीय दृष्टिकोण : अभिलेख उन्हीं के विचार व्यक्त करते हैं जो उन्हें बनवाते हैं (प्रायः राजा)। इसलिए इसमें खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ नहीं मिलतीं।
* अशोक की वेदना का उदाहरण : अशोक का एक अभिलेख कलिंग युद्ध के पश्चाताप को दर्शाता है, लेकिन यह अभिलेख उड़ीसा (कलिंग) में नहीं मिला है। शायद राजा की वेदना उस क्षेत्र के लोगों के लिए इतनी दर्दनाक थी कि वह इसे वहाँ लिखवा नहीं सका।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Exam Special)
(क) सही उत्तर चुनिए (Tick the Correct Answer)
1. जेम्स प्रिंसेप ने किन लिपियों का अर्थ निकाला था?
(A) पाली और प्राकृत
(B) ब्राह्मी और खरोष्ठी
(C) संस्कृत और तमिल
(D) यूनानी और अरामेइक
➤ उत्तर: (B) ब्राह्मी और खरोष्ठी
2. छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में सबसे शक्तिशाली महाजनपद कौन सा था?
(A) कुरु
(B) गांधार
(C) मगध
(D) अवन्ति
➤ उत्तर: (C) मगध
3. 'इंडिका' (Indica) नामक पुस्तक का लेखक कौन था?
(A) कौटिल्य
(B) मेगस्थनीज़
(C) चंद्रगुप्त
(D) हरिषेण
➤ उत्तर: (B) मेगस्थनीज़
4. 'देवानांपिय' और 'पियदस्सी' उपाधियाँ किस शासक से संबंधित हैं?
(A) समुद्रगुप्त
(B) चंद्रगुप्त मौर्य
(C) अशोक
(D) कनिष्क
➤ उत्तर: (C) अशोक
5. प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) की रचना किसने की थी?
(A) बाणभट्ट
(B) हरिषेण
(C) कौटिल्य
(D) कालिदास
➤ उत्तर: (B) हरिषेण
(ख) रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)
* अभिलेखों के अध्ययन को _________ कहते हैं।
✦ उत्तर: अभिलेखशास्त्र (Epigraphy)
* मौर्य साम्राज्य के संस्थापक _________ थे।
✦ उत्तर: चंद्रगुप्त मौर्य
* आरंभिक भारत का सबसे प्रसिद्ध विधि ग्रंथ _________ है।
✦ उत्तर: मनुस्मृति
* भूमिदान जो ब्राह्मणों को दिया जाता था, उसे _________ कहा जाता था।
✦ उत्तर: अग्रहार
* सोने के सबसे भव्य और उत्तम सिक्के _________ शासकों ने जारी किए थे।
✦ उत्तर: गुप्त
(ग) एक पंक्ति वाले प्रश्न (One Line Questions)
1. 'महापाषाण' (Megaliths) क्या हैं?
➤ उत्तर: ईसा पूर्व पहली सहस्राब्दि में दक्षिण भारत में शवों को दफनाने के लिए बनाए गए बड़े पत्थरों के ढाँचे 'महापाषाण' कहलाते हैं।
2. 'गहपति' शब्द का क्या अर्थ है?
➤ उत्तर: यह घर का मुखिया होता था, जिसका घर की महिलाओं, बच्चों, दासों और भूमि/जानवरों पर नियंत्रण होता था। (यह शब्द छोटे किसानों के लिए भी प्रयुक्त होता था)।
3. अर्थशास्त्र की रचना किसने की?
➤ उत्तर: इसके कुछ भाग कौटिल्य (चाणक्य) ने रचित किए थे, जो चंद्रगुप्त मौर्य के मंत्री थे।
4. अशोक के अभिलेख किन लिपियों में लिखे गए थे?
➤ उत्तर: अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी में, पश्चिमोत्तर के कुछ खरोष्ठी में, और अफगानिस्तान में यूनानी और अरामेइक लिपियों में लिखे गए थे।
5. 'श्रेणी' (Guilds) से आप क्या समझते हैं?
➤ उत्तर: यह उत्पादकों और व्यापारियों का एक संघ होता था जो कच्चा माल खरीदकर सामान तैयार करता था और बाजार में बेचता था।
(घ) बड़े प्रश्न और उत्तर (Big Questions - Long Answer Type)
प्रश्न 1: मगध के एक शक्तिशाली महाजनपद के रूप में उदय के क्या कारण थे? (Most Important for Exam)
उत्तर : आधुनिक इतिहासकारों और बौद्ध/जैन लेखकों ने मगध की शक्ति के कई कारण बताए हैं:
✦ उपजाऊ कृषि: गंगा की घाटी में होने के कारण यहाँ उपज बहुत अच्छी थी।
✦ लोहे की उपलब्धता: झारखंड के पास लोहे की खदानें थीं, जिससे मजबूत हथियार और उपकरण बनाए जा सकते थे।
✦ हाथी: यहाँ के जंगलों में हाथी उपलब्ध थे, जो सेना का मुख्य अंग थे।
✦ सस्ता परिवहन: गंगा और उसकी उपनदियों से आवागमन सस्ता और सुलभ था।
✦ योग्य शासक: बिंबिसार, अजातसत्तु और महापद्मनंद जैसे महत्त्वाकांक्षी राजाओं की नीतियों ने मगध को मजबूत बनाया।
✦ सुरक्षित राजधानी: राजगीर पहाड़ियों से घिरी थी और बाद में पाटलिपुत्र जलमार्ग के किनारे स्थित थी।
प्रश्न 2 : मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षणों की चर्चा कीजिए।(Exam Favourite)
उत्तर : मौर्य साम्राज्य का प्रशासन बहुत व्यवस्थित था:
✦ पाँच राजनीतिक केंद्र: साम्राज्य में राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र थे—तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि।
✦ असमान नियंत्रण: साम्राज्य विशाल था, इसलिए राजधानी और प्रांतीय केंद्रों के आसपास नियंत्रण सबसे कड़ा था, जबकि दूरदराज के इलाकों में कम।
✦ सैन्य प्रबंधन: मेगस्थनीज़ के अनुसार, सेना के संचालन के लिए 1 समिति और 6 उपसमितियाँ थीं। इनका काम नौसेना, यातायात, पैदल सेना, अश्वारोही, रथ और हाथियों का प्रबंधन करना था।
✦ धम्म का प्रचार: अशोक ने लोगों के जीवन को सुधारने और साम्राज्य को एक रखने के लिए 'धम्म महामात्त' नियुक्त किए।
प्रश्न 3 : अभिलेखों से ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त करने में क्या समस्याएँ आती हैं? (अभिलेख साक्ष्य की सीमाएँ)
(Analytical Question)
उत्तर : अभिलेख जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, लेकिन इनकी सीमाएँ भी हैं:
✦ तकनीकी समस्याएँ: अक्षर कई बार हल्के खुदे होते हैं जिन्हें पढ़ना मुश्किल होता है। अभिलेख टूट भी सकते हैं जिससे शब्द लुप्त हो जाते हैं।
✦ संदर्भ और अर्थ: शब्दों का वास्तविक अर्थ (Context) समझना कठिन होता है क्योंकि वे किसी विशेष समय या स्थान से जुड़े होते हैं।
✦ सीमित चित्रण: अभिलेख केवल "बड़े और विशेष अवसरों" का ही वर्णन करते हैं। इनमें खेती की दैनिक प्रक्रिया और आम आदमी के सुख-दुख का उल्लेख नहीं मिलता।
✦ पक्षपातपूर्ण: अभिलेख बनवाने वाले (प्रायः राजा) के विचारों को ही दर्शाते हैं, न कि पूरी सच्चाई को।
प्रश्न 4 : छठी शताब्दी ई.पू. से उपज बढ़ाने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए गए?
उत्तर : बढ़ती जनसंख्या और करों (Taxes) को चुकाने के लिए उपज बढ़ाने के तरीके अपनाए गए:
✦ हल का प्रयोग: उर्वर कछारी क्षेत्रों (गंगा-कावेरी घाटी) में लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग शुरू हुआ। इससे गहरी जुताई संभव हुई।
✦ धान की रोपाई: गंगा घाटी में धान की रोपाई शुरू हुई जिससे उपज में भारी वृद्धि हुई।
✦ कुदाल का प्रयोग: पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में जहाँ हल चलाना मुश्किल था, वहाँ कुदाल का उपयोग किया गया।
✦ सिंचाई साधन: राजाओं और कृषक समुदायों ने मिलकर कुएँ, तालाब और नहरें (जैसे सुदर्शन झील) बनवाईं।
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